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सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद-प्रतिमा देवी को धोखाधड़ी के आरोपों पर पेश करने होंगे सबूत

ग्वालियर के अतिरक्त जिला एवं सत्र न्यायालय में सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे से जुड़े विवाद में 29 अक्टूबर को प्रतिमा देवी राना की गवाही होगी। उन्होंने समझौते पर धोखे से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया है, जबकि दूसरे पक्ष ने हस्ताक्षर सहमति से होने की बात कही है।
सिंधिया राजघराने की 41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद-प्रतिमा देवी को धोखाधड़ी के आरोपों पर पेश करने होंगे सबूत
फाइल फोटो

ग्वालियर। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने मामले में बुधवार को सिंधिया राजघराने की करीब 41 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले में प्रतिमा देवी राना की गवाही के लिए 29 अक्टूबर की तारीख तय की है। प्रतिमा देवी को अपने उन आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे, जिनमें उन्होंने संपत्ति बंटवारे के समझौता प्रस्ताव पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराए जाने की बात कही है। अंतरिम आवेदनों और आपत्तियों पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने गवाही की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। प्रतिमा देवी ने अदालत में आवेदन देकर समझौते पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि हस्ताक्षर उनकी वास्तविक सहमति से नहीं कराए गए थे। उन्होंने मुकदमे में दोबारा अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने और संपत्ति में अपने अधिकारों पर विचार किए जाने की मांग भी की है।

बंटवारें पर धोखे से हस्ताक्षर करने का आरोप

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ की बेटी प्रतिमा देवी ने सहमति से हुए बंटवारे का विरोध किया है। प्रतिमा देवी का तर्क है कि बंटवारे पर जो हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, धोखे से कराए गए हैं। इसके लिए साक्ष्य कराए जाएं। उषा राजे, राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे ने विरोध करते हुए कहा कि हस्ताक्षर सहमति से हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद परिवार डिनर भी हुआ था। फोटोग्राफ्स भी खींचे गए थे। इसलिए धोखे से हस्ताक्षर नहीं कराए हैं। वहीं सिंधिया की ओर से कहा गया कि साक्ष्य की जरूरत नहीं है। हस्ताक्षर सहमति से किए गए हैं।

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पहले अदालत ने घोषित किया था एकपक्षीय

संपत्ति के मूल सिविल मुकदमे में वसुंधरा राजे, यशोधरा राजे और उषा राजे ने पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी की मांग की थी। इस मामले में दिवंगत पद्मावती राजे की बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को भी पक्षकार बनाया गया था। पूर्व में सुनवाई के दौरान अदालत में उपस्थित नहीं होने के कारण दोनों को एक पक्षीय घोषित कर दिया गया था। बाद में प्रतिमा देवी ने अदालत का रुख करते हुए मामले में अपनी भागीदारी और समझौते की वैधता पर आपत्ति दर्ज कराई। उनकी इस आपत्ति पर अब न्यायालय में आगे सुनवाई होनी है।

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Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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