Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

चंबल घाटी की पांच नदियों मे मिल रहा है दुर्लभ कछुओं को जीवनदान

विश्व कछुआ दिवस पर विशेष : संकटग्रस्त प्रजातियों के कछुओं को प्राकृतिक आवास दे रहा अभ्यारण्य
चंबल घाटी की पांच नदियों मे मिल रहा है दुर्लभ कछुओं को जीवनदान

इटावा/ग्वालियर। दशकों तक डाकू गिरोहों के आशियाने के तौर पर कुख्यात रही चंबल घाटी की पांच नदियों में हजारों सालों से प्राकृतिक रूप से दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को जीवनदान मिल रहा है। पर्यावरणीय दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहे सोसाइटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के महासचिव डॉ. राजीव चौहान ने बताया कि पांच नदियों के संगम के रूप में लोकप्रिय चंबल-इटावा (उप्र) कछुओं के प्राकृतिक रूप से संरक्षण में अहम स्थान माना जा सकता है। यहां देश की सबसे सबसे स्वच्छ नदी के नाम से जाने जाने वाली चंबल व अन्य चार नदियां यमुना, क्वारी, सिंध और पहुज प्रवाहित होती है। पांचों में खासी तादात में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का संरक्षण होता है।

सफाई कर्मी हैं कछुए

कछुओं को नदियों का सफाईकर्मी माना जाता है। डॉ.चौहान ने बताया यह बात सही है कि हजारों सालों से चंबल घाटी की इन नदियों में सफाई कर्मियों की भूमिका निभा रहे दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को संरक्षण मिल रहा है।

इसलिए यहां बढ़ रही संख्या

चंबल नदी में कटाव से बने लंबे बीहड़ जलीय जीवन की रक्षा करते रहे हैं। इसीलिए चंबल नदी में अब तक डॉलफिन,घड़ियाल ,मगर और दुर्लभ प्रजाति के कछुआ की सुरक्षा होती रही है। -मनोज जैन, वन्य प्राणी समीक्षक

तीन दशक में करीब तीस हजार के आसपास दुर्लभ कछुओं का रेस्क्यू वन तथा पुलिस विभाग के सहयोग से किया है। रेस्क्यू किए गए दुर्लभ कछुओं को उनके प्रकृतिवास में छोड़कर उनको नया जीवन दिया गया है। - डॉ. राजीव चौहान (पर्यावरणविद्र)

चंबल नदी में कोटा से लेकर पंचनदा में कई प्रजाति के कछुए पाए जाते हैं। उनकी गणना वास्तविक रूप से की नहीं गई है। यह भी सही है कि चंबल में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं को संरक्षण मिल रहा है। - भूरा गायकवाड अधीक्षक, चंबल अभ्यारण

People's Reporter
By People's Reporter

Latest Posts