
भोपाल। मोहन कैबिनेट में रविवार को बड़ा बदलाव किया गया। कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ लेने के 13 दिन बाद आखिरकार रामनिवास रावत को विभाग मिल ही गया। रामनिवास रावत को वन एवं पर्यावरण विभाग का मंत्री बनाया गया है। वहीं मंत्री नागर सिंह चौहान का कद फिलहाल घटा दिया गया है। उनसे वन और पर्यावरण विभाग वापस ले लिया गया। मंत्री नागर के पास अब सिर्फ अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग रहेगा।
कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए रामनिवास रावत ने 8 जुलाई को मंत्री पद की शपथ ली थी। 13 दिन बाद अब उन्हें विभाग मिला है। बाकी मंत्रियों के विभाग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
रावत ने 8 जुलाई को ली थी शपथ
बता दें कि रामनिवास रावत ने 8 जुलाई 2024 को राजभवन में आयोजित शपथ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की थी। राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने उन्हें शपथ दिलाई थी। शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई मंत्री शामिल रहे। इसके तत्काल बाद उन्हें मंत्रालय में कार्यालय के लिए कमरा मिल गया था, लेकिन अब तक उन्हें विभाग नहीं मिला था। रविवार को उन्हें विभाग बांट दिया गया है।
कांग्रेस में 6 बार के विधायक रहे रावत
श्योपुर की विजयपुर सीट से रामनिवास रावत 6 बार के कांग्रेस विधायक रह चुके हैं। वह प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष भी रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले 30 अप्रैल 2024 को उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली थी। लोकसभा चुनाव में टिकट बंटवारे से वे नाराज थे। रामनिवास रावत मुरैना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन पार्टी ने पूर्व विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार नीटू को टिकट दे दिया था। राहुल गांधी ने भी उन्हें मनाने की कोशिश की थी लेकिन उन्होंने लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा जॉइन कर ली।
प्रदेश की राजनीति में अपना दबदबा बनाने वाले रामनिवास ओबीसी नेता के रूप में बड़ा चेहरा हैं। वे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे दिग्विजय सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
25 दिसंबर 2023 को हुआ था पहला विस्तार
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजे 3 दिसंबर 2023 को आए थे। जिसके 8 दिन बाद 11 दिसंबर को मुख्यमंत्री पद पर डॉ. मोहन यादव और दो उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, जगदीश देवड़ा का चयन किया गया। इसके 2 दिन बाद 13 दिसंबर को डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला ने उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। वहीं 12 दिन बाद 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ। 18 विधायकों को कैबिनेट और 10 विधायकों को राज्यमंत्री के रूप में शपथ दिलाई गई थी। इसके 5 दिन बाद 30 दिसंबर को मंत्रियों को विभागों का बंटवारा किया गया।
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