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Delhi Budget 2023 : केजरीवाल का केंद्र पर हमला- नीचे से ऊपर तक अनपढ़ों की जमात बैठा रखी है

दिल्ली का बजट रोकने का मामला, एलजी ऑफिस के सूत्र बोले- आप लोगों को गुमराह कर रही

नई दिल्ली। दिल्ली के बजट को लेकर मंगलवार को केंद्र और केजरीवाल सरकार आमने-सामने रही। सुबह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गृह मंत्रालय पर राज्य का बजट रोकने का आरोप लगाया। हालांकि, शाम को उपराज्यपाल ऑफिस (LG ऑफिस) के सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दिल्ली सरकार के बजट को मंजूरी दे दी है। सूत्र ने कहाा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उनके मंत्री और आम आदमी पार्टी दिल्ली के लोगों और मीडिया को गुमराह कर रही है। सरकार की नाकामियों से लोगों का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से दिल्ली की आप सरकार खुद जानबूझकर झूठे बयान दे रही है।

75 साल में ऐसा कभी नहीं हुआ : केजरीवाल

सुबह से दोपहर तक केंद्र पर आरोपों के बाद दिल्ली सरकार को बजट मंजूर होने की सूचना भेज दी गई। इसके बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विधानसभा में चर्चा के दौरान केंद्र सरकार पर एक बार फिर तगड़ा हमला किया। केजरीवाल ने कहा-  बजट पर केंद्र की आपत्ति असंवैधानिक और निराधार है। देश के 75 साल के इतिहास में किसी भी सरकार का बजट नहीं रोका गया। उन्होंने कहा-  बजट में इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 20 हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए थे और विज्ञापन के लिए 500 करोड़। हमने कभी नहीं सुना कि 500 करोड़ 20 हजार करोड़ से अधिक है। केंद्र सरकार ने नीचे से ऊपर तक अनपढ़ों की जमात बैठा रखी है।

केंद्र नहीं रोक सकता बजट

एलजी ऑफिस के सूत्र ने कहा- वह (AAP) कह रहे हैं कि केंद्र ने राज्य का बजट रोक दिया है। यह साफ तौर पर झूठ है। दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है न कि राज्य और इसलिए यह पूर्ण रूप से भारत सरकार का हिस्सा है। साथ ही बजट रोका नहीं गया।

केजरीवाल ने पीएम को लिखी थी चिट्ठी

इससे पहले बजट को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्‌ठी लिखी थी। उन्होंने कहा- प्रधानमंत्री जी, कृपया बजट मत रोकिए। 75 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब दिल्ली में बजट पेश होने से एक दिन पहले केंद्र ने इस पर रोक लगा दी है। ये सीधे तौर पर केंद्र सरकार की गुंडागर्दी है।

राष्ट्रपति की लेनी होती है मंजूरी

एलजी ऑफिस के सूत्रों के मुताबिक संविधान के अनुसार विधानसभा में दिल्ली का बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और मंजूरी लेनी होती है। पिछले 28 साल से यह प्रक्रिया चल रही है। सूत्र ने आरोप लगाया- बजट के लिए राष्ट्रपति की स्वीकृति मांगने से पहले बजट पेश करने की तारीख तय करना, अपने आप में गलत है और आप सरकार की दुर्भावना को दिखाता है। मुख्यमंत्री को मालूम था कि उपराज्यपाल ने वित्तीय बयान को स्वीकृति दे दी है और 9 मार्च के बाद से कुछ आपत्तियां जताई हैं, जब उपराज्यपाल सचिवालय ने उन्हें फाइल भेजी थी। हालांकि, उपराज्यपाल की किसी आपत्ति को हल नहीं किया गया। आप ने आरोप लगाया कि अगर बजट पेश नहीं किया गया तो कर्मचारियों के वेतन रोक दिए जाएंगे। इन आरोपों को खारिज करते हुए सूत्र ने कहा कि एक मीडिया मंच के जरिए लोगों को गुमराह किया गया कि दिल्ली सरकार के कर्मचारियों को वेतन नहीं दिया जाएगा।

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