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रुद्राक्ष महोत्सव : फुलेरा दूज पर कुबेरेश्वरधाम में भक्तों का सैलाब, पांच क्विंटल फूलों से हुआ श्रृंगार

सीहोर जिले के चितावलिया हेमा स्थित कुबेरेश्वरधाम में जारी सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव के पांचवें दिन श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान मंदिर परिसर को पांच क्विंटल फूलों से सजाया गया। भव्य आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए 50,000 स्क्वायर फीट में विशाल पंडाल तैयार किए गए हैं।

श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

महोत्सव में श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं-

पेयजल सुविधा : 50 से अधिक टैंकरों की व्यवस्था

स्वास्थ्य सेवाएं : तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आधा दर्जन एंबुलेंस और 35 से अधिक मेडिकल स्टाफ

भोजन और प्रसादी वितरण:

  • 50 क्विंटल आटे की चपाती
  • 20 किलो बालूशाही
  • 40 क्विंटल खिचड़ी
  • 20 क्विंटल चावल
  • 10 क्विंटल नुक्ती
  • ठंडाई और नींबू पानी की व्यवस्था

शिवलिंग पर जल और धतूरा अर्पित

फुलेरा दूज के अवसर पर लाखों श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर जल और धतूरा अर्पित किया। मध्य रात्रि से ही श्रद्धालु धाम पर पहुंचने लगे थे और भजन-कीर्तन में लीन रहे।

पंडित प्रदीप मिश्रा के प्रवचन में उमड़ी भीड़

अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में प्रतिदिन लाखों भक्त उपस्थित हो रहे हैं। उन्होंने अपने प्रवचन में कहा—

“अगर हमारे पास धन, समय और वस्तुएं हैं तो जरूरतमंदों की मदद करने में पीछे नहीं हटना चाहिए। परोपकार सबसे बड़ा पुण्य है।”

शिवकथा स्थल कैलाश का प्रतीक

पंडित मिश्रा ने कहा, “शिवपुराण के अनुसार शिवकथा का स्थल कैलाश का प्रतीक होता है।” भक्त रातभर भजन-कीर्तन करते हैं और सुबह शिव जाप में लीन हो जाते हैं।

समापन कार्यक्रम

तीन मार्च को सात दिवसीय रुद्राक्ष महोत्सव का समापन होगा। इस दिन शिवलिंग का फलों के रस से अभिषेक किया जाएगा और अंतिम कथा का आयोजन किया जाएगा।

शिव महापुराण कथा और महोत्सव में हर रोज लाखों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया है।

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