कैशलेस इलाज में 4 लाख की सीमा घटाने के प्रस्ताव पर कर्मचारी संगठनों की आपत्ति

भोपाल। प्रदेश के कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए प्रस्तावित कैशलेस इलाज योजना के अंतिम प्रारूप को लेकर एक नया पेंच सामने आया है। स्वास्थ्य विभाग ने नॉन-इंपैनल्ड अस्पतालों में इलाज के लिए 4 लाख रुपए तक की सीमा का प्रस्ताव रखा था। अब वित्त विभाग की ओर से इसे घटाकर 1.50 लाख रुपए करने का सुझाव दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस पर कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब योजना के लिए कर्मचारियों और पेंशनर्स से प्रीमियम लिया जाना है तो इलाज की सीमा कम नहीं की जानी चाहिए। योजना का अंतिम प्रारूप अभी तय होना बाकी है।
2018 से चल रहा कैशलेस इलाज का मामला
मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक के मुताबिक कैशलेस इलाज का मामला 2018 से चल रहा है। 2019 में तत्कालीन एसीएस फाइनेंस अनुराग कुमार जैन की अध्यक्षता में इस संबंध में बैठक हुई थी। इसके बाद कई स्तरों पर चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव अंतिम रूप नहीं ले सका। 18 मई 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणा के बाद प्रक्रिया में तेजी आई। अब सीमा को लेकर विभागों के बीच विचार-विमर्श चल रहा है।
वेतन से कटेगा प्रीमियम
प्रस्ताव में कर्मचारियों से वेतन के आधार पर मासिक प्रीमियम लेने की व्यवस्था पर विचार किया गया है। चतुर्थ श्रेणी से 700, तृतीय श्रेणी से 1000 तथा द्वितीय एवं प्रथम श्रेणी के अधिकारियों से 1200 से 1500 रुपए तक मासिक कटौती का प्रस्ताव बताया गया है। पेंशनर्स से एकमुश्त राशि लेने की व्यवस्था पर भी विचार हुआ है।
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1.50 लाख रुपए की सीमा पर्याप्त नहीं
मंत्रालयीन कर्मचारी-अधिकारी संघ के अध्यक्ष सुभाष वर्मा ने कहा कि महंगाई के मौजूदा दौर में 1.50 लाख रुपए की सीमा पर्याप्त नहीं होगी। 4 लाख रुपए की सीमा वाला प्रस्ताव ही रखा जाना चाहिए। वहीं पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन के संरक्षक गणेशदत्त जोशी ने कहा कि गंभीर बीमारी या ऑपरेशन की स्थिति में डेढ़ लाख रुपए में इलाज पूरा कराना मुश्किल होगा।




















