
प्रवीण श्रीवास्तव-भोपाल। ड्राइविंग लाइसेंस और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन में हो रही देर के कारण प्रदेश के एक लाख से ज्यादा आवेदक परेशान हो रहे हैं। आरटीओ में चिप वाले स्मार्ट कार्ड की भारी किल्लत है। स्मार्ट चिप कंपनी के काम बंद करने के बाद करने के बाद नया अनुबंध नहीं हुआ है।
हालात यह हैं कि अकेले राजधानी भोपाल में ही करीब 25 हजार आवेदकों को स्मार्ट कार्ड नहीं मिल सके हैं। विभाग द्वारा आवेदकों को वेबसाइट से कार्ड की पीडीएफ डाउनलोड करने की सलाह दी जा रही है। वहीं कई आवेदक ऐसे भी हैं, जिनका कार्ड तो बन गया लेकिन डाउनलोड नहीं हो रहा।
यह परेशानी निजी कंपनी स्मार्ट चिप द्वारा काम बंद करने से हो रही है। कंपनी के पास लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने का जिम्मा था। 30 सितंबर 2024 में कंपनी ने विभाग पर करोड़ों रुपए का बकाया न देने का आरोप लगाकर काम बंद कर दिया।
इधर, आवेदक हो रहे परेशान
ग्रीन पार्क कॉलोनी में रहने वाले देवेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने परमानेंट लाइसेंस बनवाया, तो उन्हें कार्ड नहीं दिया गया। उनके पास स्मार्ट फोन भी नहीं है, ताकि वह कार्ड डाउनलोड कर सकें। एक सप्ताह पहले उन्हें ट्रैफिक पुलिस ने लाइसेंस नहीं होने पर चालान भी बना दिया। उन्होंने अपनी परेशानी भी बताई, लेकिन पुलिस नहीं मानी।
जिम्मेदार भी मान रहे- जारी रहेगी किल्लत
स्मार्ट कार्ड की किल्लत के बारे में जिम्मेदारों को जानकारी है। परिवहन विभाग के अधिकारी मानते हैं कि स्मार्ट कार्ड का काम बदलने वाला है। हालांकि जब तक नई कंपनी काम नहीं संभालती, तब तक यह परेशानी बनी रहेगी।
इसलिए हुआ विवाद
आरटीओ के मुताबिक, स्मार्ट चिप लर्निंग लाइसेंस का 111 रुपए, परमानेंट लाइसेंस कार्ड बनाने का 3.06 रुपए और रजिस्ट्रेशन कार्ड बनाने का 3.96 रु. लेती थी। यह स्मार्ट चिप कंपनी केंद्र के नेशनल इंफोर्मेटिक्स सेंटर सर्विस (निक्सी) का उपक्रम है। निक्सी, स्मार्ट चिप कंपनी को ड्राइविंग लाइसेंस के कार्ड करीब 32 रु. और रजिस्ट्रेशन कार्ड 28 रु. में उपलब्ध कराता था। ऐसे में यह घाटा लर्निंग लाइसेंस से कवर होता था। 2019 में सारथी पोर्टल शुरू होने के बाद लर्निंग लाइसेंस का आवेदक खुद प्रिंट निकाल सकता है। ऐसे में कंपनी का मुनाफा खत्म हो गया। तब कंपनी और विभाग में मतभेद बढ़ने लगे।
ई-कार्ड के ले रहे 200 रु.
विभाग स्मार्ट कार्ड देने के लिए 200 रु. शुल्क लेता था। एक महीने से आवेदकों को कार्ड नहीं दिए जा रहे, बावजूद उनसे 200 रु. लिए जा रहे हैं। विभाग के पूर्व अपर आयुक्त उमेश जोगा ने आवेदकों से 200 रु. नहीं लेने को कहा था, लेकिन अमल नहीं हुआ।
यह है ई-कार्ड व्यवस्था
- एक अक्टूबर को ई-कार्ड का नियम लागू है।
- ई-कार्ड लोग सुविधा के अनुसार ऑनलाइन निकाल सकेंगे या अपने फोन में रख सकेंगे।
- यह देशभर में भी मान्य होंगे।
- ई-कार्ड एम परिवहन ऐप पर उपलब्ध है।
जब तक नई कंपनी नहीं आएगी, तब तक आवेदक ई-कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं। यह सभी जगह मान्य हैं। 200 रुपए के शुल्क के लिए सरकार फैसला लेगी। -जितेंद्र शर्मा, प्रभारी आरटीओ, भोपाल
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