
अहमदाबाद। गुजरात में मोरबी पुल हादसे की घटना में सरकार हर मृतक के परिवार को अतिरिक्त मुआवजा देगी। सरकार ने इस संबंध में गुजरात हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर जानकारी दी है। इसके मुताबिक प्रत्येक मृतक के परिवार को 10 लाख रुपए का अतिरिक्त मुआवजा देने के साथ ही घायलों को एक-एक लाख रुपए का अनुदान दिया जाएगा।
134 लोगों की हुई थी मौत
30 अक्टूबर को मोरबी जिले की मच्छु नदी में बना केबल ब्रिज गिरने की घटना में 134 लोगों की मौत हो गई थी। 7 नवंबर को गुजरात हाईकोर्ट ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए गृह विभाग सहित अधिकारियों को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा था कि हम राज्य सरकार से सख्त से सख्त कार्रवाई की उम्मीद करते हैं। नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोरबी बिज का गिरने की घटना एक भारी त्रासदी थी। इस हादसे से पहले भी गुजरात हाईकोर्ट इससे संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा था। उसने उस मामले की सुनवाई रोककर इस मामले में स्वत: संज्ञान लिया था।
मेंटेनेंस कंपनी पर दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में गुजरात पुलिस ने जो FIR दर्ज की थी, वह पुल का मेंटेनेंस और मैनेजमेंट करने वाली कंपनी ओरेवा के खिलाफ थी। पुलिस के मुताबिक इसका मेंटेनेंस कर इसे 26 अक्टूबर को ही चालू किया गया था और 4 दिन बाद ही यह गिर गया। प्रथम दृष्टया जांच में सामने आया था कि मेंटेनेंस करने वाली कंपनी ने ठीक से काम नहीं किया। इस मामले में आरोपी कंपनी ओरेवा के मैनेजर दीपक पारेख ने कोर्ट में इसे एक्ट ऑफ गॉड करार दिया था। घटना में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
केबल में लगी थी जंग
मोरबी के एसपी पीए जाला ने कोर्ट को बताया कि पुल के केबल में जंग लग गई थी। लेकिन मेंटेनेंस के दौरान कंपनी ने इसे नहीं बदला। यही नहीं बिना क्वालिटी चेक के ही इसे 26 अक्टूबर को जनता के लिए खोल दिया गया था। मरम्मत के नाम पर केवल प्लेटफॉर्म बदला गया था। केबल की ग्रीसिंग तक नहीं की गई थी। पुलिस का मानना था कि यदि केबल बदल दी जाती तो शायद हादसा नहीं होता।
मार्च में दिया गया था कॉन्ट्रैक्ट
ओरेवा ग्रुप को मार्च 2022 में मोरबी के सस्पेंशन ब्रिज के मेंटेनेंस का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया। तभी से यह पुल आम जनता के लिए बंद था। गुजराती नववर्ष के मौके पर 26 अक्टूबर को पर्यटकों और जनता के लिए इसे खोला गया। मोरबी नगर पालिका ने इस पुल को ओरेवा ग्रुप को 15 साल के लिए दिया था।