शहडोल में 870 ग्राम की बच्ची को मिला जीवनदान, 58 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटी

शहडोल। बच्ची की नाजुक हालत को देखते हुए उसे जिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती किया गया था। डॉक्टरों ने वेंटिलेटर के बजाय सीपैप मशीन के सपोर्ट और जरूरी दवाओं से उसका इलाज किया। इलाज के दौरान चार बार बच्ची की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ी और हीमोग्लोबिन की कमी के कारण चार बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी करना पड़ा। मां की कंगारू मदर केयर और मेडिकल टीम की लगातार निगरानी से बच्ची का वजन बढ़कर 1 किलो 700 ग्राम हो गया और फॉलोअप जांच में भी वह स्वस्थ पाई गई।
वेंटिलेटर के बजाय सीपैप मशीन से किया इलाज
बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर पर रखने के बजाय गैर-आक्रामक तकनीक अपनाई और सीपैप (CPAP) मशीन के सपोर्ट पर रखा। फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए जरूरी दवाएं दी गईं और लगातार निगरानी की गई। 58 दिनों के लंबे उपचार के दौरान करीब चार बार बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ी और वह जीवन-मरण के दोराहे पर पहुंच गई। हालांकि, डॉक्टरों की मुस्तैद निगरानी और समय पर उपचार से हर बार उसकी हालत संभाल ली गई।
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कंगारू मदर केयर से रिकवरी में मिली मदद
इलाज के दौरान बच्ची के शरीर में हीमोग्लोबिन की भारी कमी होने पर उसे चार बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी किया गया। दवाइयों और तकनीकी उपचार के साथ मां की कंगारू मदर केयर (केएमसी) पद्धति ने भी बच्ची की रिकवरी में अहम भूमिका निभाई। इस पद्धति से बच्ची के शरीर का तापमान नियंत्रित रखने और संक्रमण का जोखिम कम करने में मदद मिली। अस्पताल से छुट्टी के समय बच्ची का वजन 870 ग्राम से बढ़कर 1 किलो 700 ग्राम हो गया था और फॉलोअप जांच में भी वह पूरी तरह स्वस्थ और सामान्य पाई गई।
डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की रही सराहनीय भूमिका
इस सफलता में सीएमएचओ डॉ. राजेश मिश्रा और सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ के नेतृत्व में एसएनसीयू प्रभारी डॉ. सुनील कुमार हथगेल, डॉ. सुप्रिया, डॉ. कृष्णेंद्र, डॉ. बृजेश पटेल और नर्सिंग इंचार्ज अपर्णा सिंह सहित नर्सिंग और सपोर्ट स्टाफ की सराहनीय भूमिका रही। बच्ची के स्वस्थ होने से उसके माता-पिता ने राहत जताई और पूरी चिकित्सकीय टीम का आभार व्यक्त किया। जिला अस्पताल की इस उपलब्धि ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आमजन का भरोसा और मजबूत किया है। सीमित संसाधनों और जटिल परिस्थितियों के बावजूद टीम ने लगातार 58 दिनों तक बच्ची की देखरेख की।
डॉक्टर बोले- बच्ची का वजन बेहद कम था
एसएनसीयू प्रभारी डॉ. सुनील कुमार हथगेल ने बताया कि बच्ची का वजन बेहद कम था और उसके फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे। टीम ने बिना वेंटिलेटर, केवल सीपैप सपोर्ट, सर्फेक्टेंट दवा और लगातार निगरानी के जरिए बच्ची को स्वस्थ किया। उन्होंने कहा कि मां की कंगारू मदर केयर ने भी रिकवरी में बड़ी भूमिका निभाई और अब बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है। वहीं, सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ ने टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि एसएनसीयू की 58 दिनों की मेहनत ने साबित किया है कि सही समय पर उचित इलाज मिलने से जटिल परिस्थितियों में भी मरीज को बचाया जा सकता है।




















