
फ्लोरिडा के केप कैनवरल से NASA और SpaceX के Crew-9 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर फंसे भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को धरती पर वापस लाना है। Crew-9 मिशन के तहत SpaceX के ड्रैगन कैप्सूल और फाल्कन-9 रॉकेट का इस्तेमाल किया गया है। पहले यह लॉन्चिंग 24 सितंबर 2024 को की जानी थी, लेकिन मौसम की खराबी के कारण इसे 28 को शिफ्ट किया गया।
Crew-9 मिशन की सफल लॉन्चिंग
अरबपति एलन मस्क की कंपनी SpaceX द्वारा भेजे गए इस रॉकेट में दो क्रू मेंबर्स NASA के एस्ट्रोनॉट निक हेग और रूसी एस्ट्रोनॉट एलेक्जेंडर गोरबुनोव शामिल हैं। इस मिशन का उद्देश्य इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर पहले से मौजूद सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर को वापस लाना है। पहले इस मिशन में चार एस्ट्रोनॉट्स जाने वाले थे, लेकिन सुनीता और बुच की वापसी के लिए दो लोगों की जगह को छोड़ा गया है। इस मिशन के कमांडर निक हेग हैं।

क्या है ड्रैगन कैप्सूल की खासियत
इस मिशन में उपयोग किया गया SpaceX के ड्रैगन क्रू कैप्सूल को खास तरीके से डिजाइन किया गया है। यह दुनिया का पहला निजी स्पेसक्राफ्ट है जो लगातार ISS पर एस्ट्रोनॉट्स और कार्गो लेकर आता-जाता रहा है। यह अब तक 46 बार लॉन्च हो चुका है, जिसमें से 42 बार ISS की यात्रा की है। ड्रैगन कैप्सूल एक बार में सात एस्ट्रोनॉट्स को ले जाने में सक्षम है, लेकिन आमतौर पर इसमें 2 से 4 एस्ट्रोनॉट्स ही भेजे जाते हैं।
यह कैप्सूल जब खाली होता है तब भी इसका वजन 7700 किलो और जब यह कार्गो या एस्ट्रोनॉट्स के साथ लॉन्च किया जाता है तब इसका अधिकतम वजन 12,500 किलो होता है। स्पेस स्टेशन तक यह 3307 किलोग्राम वजन पहुंचा सकता है या वापस ला सकता है। यह अपने दम पर ऑर्बिट में 10 दिनों तक रह सकता है, जबकि ISS से जुड़ने पर यह 210 दिनों तक रह सकता है।

सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की होगी वापसी
भारतीय मूल की एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर इस साल 5 जून को बोइंग के नए स्टारलाइनर कैप्सूल से ISS गए थे। उन्हें 13 जून को वापस लौटना था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण यह संभव नहीं हो पाया। अब उनकी वापसी SpaceX के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से फरवरी 2025 में होगी। NASA चीफ बिल नेल्सन ने बताया कि उन्हें स्टारलाइनर कैप्सूल से लाना जोखिम भरा हो सकता है, इसलिए उनके लिए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट का चयन किया गया है।
सुनीता और बुच अंतरिक्ष में अब तक 116 दिन बिता चुके हैं। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 5 जून से फंसे होने के कारण उनके लिए वापसी का यह मिशन अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
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