बारिश कम हुई तो खेत में क्या बोएं? जानिए कम पानी में तैयार होने वाली फायदेमंद फसलें

इस साल कमजोर मॉनसून ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। 2026 का मॉनसून सामान्य से 12.6 फीसदी कम बारिश के साथ खत्म हुआ है। मौसम विभाग ने अक्टूबर में भी सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है। इसके अलावा अल नीनो का असर भी बना हुआ है। ऐसे हालात में किसानों के लिए खेती का तरीका थोड़ा बदलना जरूरी हो सकता है। अगर बारिश और सिंचाई का पानी कम है, तो ऐसी फसलों को चुनना बेहतर रहेगा, जिन्हें ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। इससे बार-बार सिंचाई पर होने वाला खर्च कम हो सकता है और मौसम खराब होने पर फसल के पूरी तरह बर्बाद होने का जोखिम भी घट सकता है।
बाजरा, ज्वार और रागी पर कर सकते हैं भरोसा
कम बारिश वाले इलाकों में बाजरा, ज्वार और रागी जैसी फसलें किसानों के लिए अच्छे विकल्प हो सकती हैं। इन फसलों की कई किस्में कम पानी और गर्म मौसम में भी अच्छी तरह बढ़ सकती हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR भी बाजरा और दूसरे मिलेट्स को सूखे और कम बारिश वाले इलाकों के लिए जलवायु के अनुकूल फसलों के तौर पर बढ़ावा देता रहा है।
कम बारिश में मक्का भी विकल्प
मक्का की खेती भी कुछ कम बारिश वाले इलाकों में की जा सकती है। हालांकि, इसकी पैदावार मिट्टी, बारिश और सिंचाई की सुविधा पर काफी निर्भर करती है। ICAR की सलाह में कई क्षेत्रों के लिए जल्दी तैयार होने वाली और कम पानी में बेहतर प्रदर्शन करने वाली मक्का की किस्मों पर जोर दिया गया है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र की मिट्टी और पानी की उपलब्धता देखकर सही किस्म का चुनाव कर सकते हैं।
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मूंग, उड़द और अरहर से भी उम्मीद
पानी की कमी वाले इलाकों में मूंग, उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें भी अच्छा विकल्प बन सकती हैं। खासकर अरहर की कुछ किस्में कम बारिश और सूखे जैसे हालात को सहन कर सकती हैं। मूंग और उड़द भी अपेक्षाकृत कम पानी में तैयार होने वाली फसलों में शामिल हैं। ऐसे में जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां किसान इन फसलों पर विचार कर सकते हैं।
तिल, मूंगफली और सोयाबीन भी काम की फसलें
तिल, मूंगफली और सोयाबीन जैसी तिलहनी फसलें भी कम नमी वाले इलाकों में उपयोगी हो सकती हैं। हालांकि, फसल का चुनाव हमेशा स्थानीय मिट्टी, मौसम और पानी की उपलब्धता को देखकर करना चाहिए। खासकर तिल और मूंगफली कम बारिश वाले क्षेत्रों में किसानों के लिए अच्छे विकल्प साबित हो सकते हैं। सही फसल चुनकर किसान पानी की कमी के बीच खेती का खर्च संभालने और मौसम से होने वाले नुकसान का जोखिम कम करने की कोशिश कर सकते हैं। किसी भी फसल का चुनाव करने से पहले अपने जिले की कृषि सलाह, मिट्टी की स्थिति, स्थानीय मौसम और उपलब्ध सिंचाई के आधार पर कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की सलाह लेना बेहतर रहेगा।




















