धर्म

Narak chaturdashi 2021: क्यों मनाई जाती है रूप चौदस, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और विधी

रुप चौदस को नरक चौदस, नर्क चतुर्दशी, रूप चतुर्दशी और नरका पूजा के नामों से जाना जाता है। इसे छोटी दीपावली के रुप में मनाया जाता है, इस दिन शाम के समय दीपक जलाकर चारों ओर रोशनी की जाती है। पंचांग में तिथि मतभेद और तिथि ह्रास होने की वजह से कुछ लोग नरक चतुर्दशी 3 नवंबर को मना रहे हैं और कुछ 4 नवंबर को। इस दिन कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर मृत्यु के देवता यमराज की पूजा का विधान होता है। रूप चौदस के दिन तिल का भोजन और तेल मालिश, दन्तधावन, उबटन व स्नान आवश्यक होता है।

श्रीकृष्ण ने किया था नरकासुर का वध

क्यों किया जाता है पूजन

नरक चतुर्दशी का पूजन अकाल मृत्यु से मुक्ति तथा स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए किया जाता है। एक पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने कार्तिक माह को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन नरकासुर का वध करके, देवताओं व ऋषियों को उसके आतंक से मुक्ति दिलवाई थी।

रूप चौदस

क्यों मनाई जाती है रूप चौदस

कहते हैं इस दिन तिल के तेल से मालिश करके, स्नान करने से भगवान कृष्ण रूप और सौन्दर्य प्रदान करते हैं। मान्यता है कि इस दिन सुबह तेल लगाकर अपामार्ग (चिचड़ी) की पत्तियां जल में डालकर नहाने से नरक से मुक्ति मिलती है। वहीं विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति सभी पापों से मुक्त होकर स्वर्ग को प्राप्त करते हैं।

काली चौदस

काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है यह दिन

शाम को यमराज के लिए दीपदान की प्रथा है। इसके अलावा पूरे भारत में रूप चतुर्दशी का पर्व यमराज के प्रति दीप प्रज्जवलित कर, यम के प्रति आस्था प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। वहीं बंगाल में यह दिन मां काली के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है, जिसकी वजह से इस दिन को काली चौदस कहा जाता है। इस दिन मां काली की आराधना का विशेष महत्व होता है। काली मां के आशीर्वाद से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सफलता मिलती है।

रूप चौदस का पूजा मुहूर्त

कृष्ण पक्ष चतुर्दशी तिथि प्रारंभ (क्षय तिथि): 03 नवंबर प्रातः 09:02 से- 4 नवंबर, 2021 को सुबह 06:03 मिनट पर समाप्त
ध्यान दें- पंचांग में तिथि मतभेद और तिथि ह्रास होने की वजह से कुछ लोग नरक चतुर्दशी 3 नवंबर को मना रहे हैं और कुछ 4 नवंबर को।

यम की पूजा

नरक चतुर्दशी की पूजा विधि

  • सूर्योदय से पहले नहाकर साफ कपड़े पहन लें।
  • इस दिन यमराज, श्री कृष्ण, भगवान शिव, काली माता, हनुमान जी और विष्णु जी के वामन रूप की विशेष पूजा की जाती है।
  • घर के ईशान कोण में इन सभी देवी देवताओं की प्रतिमा स्थापित करके विधि पूर्वक पूजा करें।
  • देवताओं के सामने धूप दीप जलाएं, कुमकुम का तिलक लगाएं और मंत्रो का जाप करें।
  • मान्यता है कि इस दिन यमदेव की पूजा करने से अकाल मृत्यु का भय खत्म होता है और सभी पापों का नाश होता है। इसलिए शाम के समय यमदेव की पूजा करें और घर के दरवाजे के दोनों तरफ दीप जलाएं।

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