JD का यू-टर्न? H-1B कर्मचारियों को 'बंधुआ मजदूर' कहकर फंसे वेंस, अब दी सफाई, बोले- मेरी भाषा शायद सही नहीं थी

वॉशिंगटन। अमेरिका में H-1B वीजा और विदेशी कर्मचारियों को लेकर जारी बहस के बीच उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने पुराने बयान पर सफाई दी है। विदेशी कामगारों के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द इस्तेमाल करने पर उनकी आलोचना हुई थी। अब वेंस ने कहा है कि शायद उनकी बात कहने का तरीका सही नहीं था। उन्होंने अपने भारतीय मूल के सास-ससुर का जिक्र करते हुए उनके प्रति प्यार और सम्मान जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका की इमिग्रेशन नीति ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विदेशी पेशेवरों को अवसर मिले, लेकिन अमेरिकी नागरिकों की नौकरियों और हितों की भी अनदेखी न हो।
‘मैं अपने भारतीय सास-ससुर से प्यार करता हूं’
वेंस ने अपनी सफाई में पत्नी उषा वेंस के परिवार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनके सास-ससुर दक्षिण भारत से अमेरिका आए थे और वह उनसे बहुत प्यार करते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी पर गर्व जताते हुए कहा कि वह अमेरिका में पैदा हुई हैं और देश की सेकंड लेडी हैं। वेंस की इस टिप्पणी को उनके पुराने बयान के बाद उठे विवाद को शांत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने विदेशी कर्मचारियों को लेकर अपने रुख में कोई बड़ा बदलाव नहीं बताया और अमेरिकी कर्मचारियों के हितों की रक्षा पर जोर दिया।
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H-1B कर्मचारियों पर बयान से क्यों मचा विवाद?
H-1B वीजा के तहत अमेरिकी कंपनियां दूसरे देशों के कुशल पेशेवरों को नौकरी पर रख सकती हैं। भारतीय आईटी कर्मचारी भी इस व्यवस्था के जरिए अमेरिका में काम करते हैं। वेंस ने इससे पहले कंपनियों से कहा था कि वे अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी लोगों को नौकरी देने से बचें। इसी दौरान उन्होंने विदेशी कर्मचारियों के लिए ‘बंधुआ मजदूर’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
इस टिप्पणी की आलोचना हुई, क्योंकि इसे विदेशी पेशेवरों के सम्मान और उनके योगदान से जोड़कर देखा गया। भारत के विदेश मंत्रालय ने भी इस बयान को अनुचित और बेहद आपत्तिजनक बताया था।
अमेरिकी कर्मचारियों के हितों पर दिया जोर
वेंस का कहना है कि इमिग्रेशन व्यवस्था में ऐसे लोगों का स्वागत होना चाहिए, जो अमेरिका की अर्थव्यवस्था में योगदान दे सकें। लेकिन कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के नाम पर अमेरिकी नागरिकों को नौकरी से न हटाया जाए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी विदेशी कर्मचारी को काम पर रखने के लिए अपने अमेरिकी कर्मचारी को निकाल देती है, तो यह उचित नहीं है। उनके मुताबिक, इमिग्रेशन नीति बनाते समय दोनों पक्षों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है।
ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को लेकर भी बहस
अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों से जुड़ा यह विवाद रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर चर्चा के बीच सामने आया है। PERM यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन, रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक अहम शुरुआती चरण है। इसमें कंपनियां पात्र विदेशी कर्मचारियों को स्थायी निवास दिलाने के लिए प्रायोजित कर सकती हैं। इस प्रक्रिया और इससे जुड़ी फाइलिंग पर प्रशासनिक कदमों को लेकर भी भारतीय आईटी कंपनियों और पेशेवरों के बीच चिंता जताई गई है। हालांकि, H-1B वीजा और PERM प्रक्रिया अलग-अलग हैं।
भारत ने भारतीय पेशेवरों के योगदान का किया बचाव
वेंस के बयान पर भारत ने कहा था कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षेत्र में भारतीय पेशेवरों का महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय कर्मचारी सूचना प्रौद्योगिकी, शोध और नवाचार जैसे क्षेत्रों में काम करते हैं। भारत का मानना है कि विदेशी कर्मचारियों के बारे में बात करते समय उनके कौशल और योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।




















