पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मुरुजुगा में पानी में डूबे दो पुरातात्विक स्थलों की खोज, 11-15 मीटर पानी के नीचे मिले प्राचीन पत्थर के औजार

सिडनी। पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के मुरुजुगा तट के निकट समुद्र के भीतर दो महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों का पता चला है। इन स्थलों से प्राप्त पत्थर के औजार इस बात की जानकारी देते हैं कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने से पहले स्वदेशी समुदाय इस क्षेत्र का किस प्रकार उपयोग करते थे। समुद्र में 11 से 15 मीटर की गहराई पर स्थित इन दोनों स्थलों से ऐसी पत्थर की कलाकृतियां बरामद हुई हैं जो स्थानीय चट्टानों के साथ-साथ 20 किलोमीटर से भी अधिक दूरी से लाई गई सामग्री से बनी हैं। यह अध्ययन 'क्वाटरनरी साइंस रिव्यूज' में प्रकाशित हुआ है। शोध पत्र का शीर्षक जलमग्न पुरातात्विक खोजों, पत्थर की कलाकृतियों के कच्चे माल के चयन और परिवहन को दर्शाता है। रिपोर्ट के अनुसार, खोजे गए स्थलों में एक जलमग्न मीठे पानी का झरना और एक प्राचीन नदी के किनारे मौजूद एक चट्टानी उभार शामिल है। शोध टीम ने कलाकृतियों के भूवैज्ञानिक स्रोत का पता लगाने के लिए पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरेसेंस विश्लेषण तकनीक का इस्तेमाल किया।
दो जलमग्न स्थलों से सामने आया प्राचीन मानव इतिहास
यह रिसर्च पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के डैम्पियर द्वीपसमूह का हिस्सा मुरुजुगा सी कंट्री में स्थित दो नए जलमग्न पुरातात्विक स्थलों पर केंद्रित है।पहला स्थल WH2 है, जो फ्लाइंग फोम पैसेज में स्थित है। यह मौजूदा तटरेखा से लगभग 400 मीटर दूर समुद्र में है। यह स्थल एक जलमग्न मीठे पानी के झरने से जुड़ा है और पहले से ज्ञात WH1 स्थल के पास स्थित है।
9000 साल पहले डूब गई थी साइट
दूसरी साइट को मैटलैंड रिवर हमॉक (MRH) के नाम से पहचाना गया है। यह एंडरबी और ईगलहॉक आइलैंड्स के बीच स्थित है, जो वर्तमान के सबसे नजदीकी भू-भाग से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर है। MRH साइट प्राचीन मैटलैंड नदी के डूबे हुए चैनल के पास मौजूद एक चट्टानी उभार पर बनी हुई है। दोनों ही पुरातात्विक स्थल समुद्र तल से 11 से 15 मीटर की गहराई पर हैं। अनुमान है कि समुद्र का जलस्तर बढ़ने के कारण ये कम से कम 9,000 साल पहले जलमग्न हो गए थे।
पानी के नीचे पत्थर के औजारों की खोज कैसे हुई
इन जलमग्न स्थलों की खोज के लिए पुरातत्वविदों, भू-वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक डाइविंग में प्रशिक्षित मुरुजुगा एबोरिजिनल कॉर्पोरेशन के रेंजर्स की एक संयुक्त टीम ने काम किया। पानी के अंदर गोता लगाने से पहले टीम ने हाई-रिजॉल्यूशन सोनार सर्वे की मदद से समुद्र तल की मैपिंग की और महत्वपूर्ण भूवैज्ञानिक संरचनाओं की पहचान की। WH2 साइट पर गोताखोरों ने कुल 158 चट्टानी नमूने एकत्र किए, जिनमें से 9 की पुष्टि पत्थर की कलाकृतियों (आर्टिफैक्ट्स) के रूप में हुई।वहीं मैटलैंड रिवर हमॉक (MRH) साइट पर, शोधकर्ताओं को चट्टानी सतह पर मौजूद बेडरॉक और समुद्री रेत के बीच से 12 आर्टिफैक्ट्स प्राप्त हुए।
प्राचीन मानव की जानकारी मिली
शोधकर्ताओं ने कलाकृतियों के भूवैज्ञानिक स्रोत की पहचान के लिए पोर्टेबल एक्स-रे फ्लोरेसेंस (pXRF) विश्लेषण का उपयोग किया। WH2 साइट के विश्लेषण में सामने आया कि जांची गई कुल वस्तुओं में से 56% स्थानीय रूप से उपलब्ध ग्रैनोफायरिक चट्टान से निर्मित थीं, जबकि 44% वस्तुएं ज्वालामुखी-अवसादी (Volcaniclastic Sedimentary) चट्टानों से बनी थीं। इन चट्टानों का स्रोत लगभग 23 किलोमीटर दूर रोजमेरी द्वीप या उसके आसपास के क्षेत्रों से जुड़ा हुआ पाया गया।वहीं मैटलैंड रिवर हमॉक (MRH) साइट पर 75% कलाकृतियां एंडेसाइट, बेसाल्ट या डोलेराइट समूह की चट्टानों से बनी थीं, जबकि शेष 25% ग्रैनोफायर से निर्मित थीं। दोनों ही प्रकार की सामग्रियां इस स्थल के निकट ही उपलब्ध थीं।
दोनों में रहने वाले लोगों का भौगोलिक दायरा अलग था
इन नतीजों से यह संकेत मिलता है कि जलमग्न झरने (Submerged Spring) वाले WH2 स्थल पर आने वाले लोग एक बड़े भौगोलिक दायरे से लाए गए पत्थरों का इस्तेमाल करते थे। वहीं MRH साइट पर मिली कलाकृतियां मुख्य रूप से आसपास के स्रोतों से ही प्राप्त की गई थीं। हालांकि, शोधकर्ता अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाए हैं कि दूर से लाई गई ये सामग्रियां लोगों की आवाजाही के माध्यम से यहां पहुंची थीं या विभिन्न समूहों के बीच आपसी आदान-प्रदान के जरिए।




















