ISRO का अंतरिक्ष में एक और कदम, INSAT-3DS की लॉन्चिंग सफल, जानिए क्या है इस मिशन के पीछे का मकसद

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ISRO का अंतरिक्ष में एक और कदम,  INSAT-3DS की लॉन्चिंग सफल, जानिए क्या है इस मिशन के पीछे का मकसद
श्रीहरिकोटा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को अपने खाते में एक और सफलता हासकिल कर ली। शाम को 5 बजकर 35 मिनट पर तीसरी पीढ़ी के उपग्रह इनसेट-3डीएस का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया गया। इस सेटेलाइट का मकसद पृथ्वी की सतह और समुद्र का अवलोकन करना है। 51.7 मीटर लंबे जीएसएलवी-एफ14 रॉकेट के जरिए ये सेटेलाइट अंतरिक्ष में भेजा गया है। इस प्रक्षेपण को देखने के लिए भीड़ ने रॉकेट के सफलतापूर्वक आसमान में रवाना होने पर तालियां बजाकर खुशी जताई। इसरो ने अपने बयान में इस प्रक्षेपणको सफल बताते हुए दावा किया कि 2,274 किलोग्राम वजनी उपग्रह भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के साथ ही पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के विभिन्न विभागों को सेवाएं प्रदान करेगा। गौलतरब है कि एक जनवरी को पीएसएलवी-सी58/एक्सपोसेट मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद 2024 में इसरो के लिए यह दूसरा मिशन है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने  मौसम की सटीक जानकारी देने वाला सैटेलाइट INSAT-3DS को लॉन्च श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से शाम 5.35 बजे लॉन्च किया । सैटेलाइट की लॉन्चिंग GSLV Mk II रॉकेट सेकी गई। उड़ान भरने के लगभग 20 मिनट बाद यह जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में पहुंच गया।  स्पेस एजेंसी ने इसे ऐसे रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया जिसे 'नॉटी बॉय' के तौर पर जाना जाता है। INSAT-3DS Launch

INSAT-3D सीरीज की सातवीं उड़ान

1 जनवरी 2024 को PSLV-C 58/EXPOSAT मिशन की लॉन्चिंग के बाद 2024 में इसरो का यह दूसरा मिशन होने वाला है। यह INSAT-3D सीरीज की सातवीं उड़ान होगी। इस सीरीज का आखिरी सैटेलाइट INSAT-3DR 8 सितंबर 2016 में लॉन्च किया गया था। INSAT 3D

INSAT-3DS के वाइब्रेशन टेस्ट नवंबर में हुआ था शुरू

इसरो के अध्यक्ष एस सोमनाथ ने 10 नवंबर 2023 को इस मिशन की जानकारी दी थी। तब उन्होंने बताया था कि INSAT-3DS के वाइब्रेशन टेस्ट शुरू हो गए हैं। यह 6-चैनल इमेजर और 19-चैनल साउंडर के जरिए मौसम से जुड़ी हर जानकारी देगा। साथ ही सर्च और रेस्क्यू के लिए जमीनी डेटा और मैसेज रिले भी करेगा। इसके बाद इसे आज यानी 17 फरवरी को लॉन्च किया जा रहा है। ISRO give information of insat

2024 में इसरो का दूसरा मिशन

ISRO ने मिशन की जानकारी देते हुए बताया, ‘GSLV-F 14/इनसैट-3DS मिशन: 17 फरवरी, 2024 को 17.35 बजे प्रक्षेपण के लिए 27.5 घंटे की उल्टी गिनती शुरू हो गई है।’ गत एक जनवरी को PSLV-C 58/ एक्सपो सेट मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद 2024 में इसरो का यह दूसरा मिशन होने वाला है। INSAT-3DS

क्या करेगा INSAT-3DS ?

रॉकेट की लंबाई 51.7 मीटर है। इसका वजन 2274 किलोग्राम है। सैटेलाइट एक बार चालू होने के बाद अर्थ साइंस, मौसम विज्ञान विभाग (IMD), नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (NIOT), मौसम पूर्वानुमान केंद्र और भारतीय राष्ट्रीय केंद्र के तहत विभिन्न विभागों को मौसम की सही जानकारी देगा। 51.7 मीटर लंबा रॉकेट इमेज पेलोड, साउंड पेलोड, डेटा रिले ट्रांसपोंडर और सैटेलाइट एडेड सर्च एंड रेस्क्यू ट्रांसपोंडर ले जाएगा। जिनका उपयोग मौसम से जुड़ी हर अपडेट पर स्टडी के लिए किया जाएगा।

कैसे पड़ा नॉटी बॉय नाम?

इस वेदर सैटेलाइट को जिस रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा, उसे ISRO का 'नॉटी बॉय' कहा जाता है। इसरो के डाटा और इसकी स्ट्राइक रेट को ध्यान में रखते हुए इसका नाम रखा गया था। दरअसल, इस रॉकेट ने अब तक अपनी 15 उड़ानों में से 6 में सटीक नतीजे नहीं दिए हैं। यानी इस तरह इसका नाकामी रेट 40 प्रतिशत है। इसे समस्याओं के लिए जाना जाता है, इसलिए इसका नाम नॉटी बॉय पड़ गया। INSAT 3D IMAGES

इनसैट सीरीज के बारे में जानें

इनसैट या इंडियन नेशनल सैटेलाइट सिस्टम, भारत की कम्युनिकेशन, टेलीकास्ट, मौसम विज्ञान और सर्च एंड रेस्क्यू की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक सैटेलाइट है। इसे इसरो ने बनाया है। यह जियो स्टेशनरी सैटेलाइट की सीरीज है। इसकी शुरुआत 1983 में की गई थी। यह एशिया की सबसे बड़ी लोकल कम्युनिकेशन सिस्टम सैटलाइट है। सैटेलाइट्स का कंट्रोल रूम कर्नाटक के हासन और मध्य प्रदेश के भोपाल में है। इस सीरीज के अब तक छह सैटेलाइट्स लॉन्च किए जा चुके हैं। आखिरी सैटेलाइट INSAT-3DR है। यह अभी भी काम कर रहा है। ये भी पढ़ें - Farmer Protest : किसान आंदोलन का आज 5वां दिन, हरियाणा में निकालेंगे ट्रैक्टर मार्च, एक पुलिसकर्मी की मौत, पंजाब में 2 दिन टोल फ्री कराएंगे; कैप्टन-जाखड़ का घर डालेंगे डेरा
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