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ISRO का मिशन मून : चंद्रयान-3 की सक्सेसफुल लॉन्चिंग, 40 दिन बाद चांद पर उतरेगा लैंडर; PM बोले- सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा दिन

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ISRO का मिशन मून : चंद्रयान-3 की सक्सेसफुल लॉन्चिंग, 40 दिन बाद चांद पर उतरेगा लैंडर; PM बोले- सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा दिन
श्रीहरिकोटा। भारत का तीसरा मून मिशन यानी चंद्रायन-3 शुक्रवार (14 जुलाई) को लॉन्च हो गया है। दोपहर 2 बजकर 35 मिनट पर LVM3-M4 रॉकेट के जरिए इसे आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से स्पेस में भेजा गया। वहीं इससे पहले पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा कि आज का दिन सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा।

50 दिन की यात्रा के बाद कराई जाएगी लैंडिंग

करीब 50 दिन की यात्रा के बाद 23-24 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर विक्रम लैंडर की सॉफ्ट लैंडिंग कराई जाएगी। अगर दक्षिणी ध्रुव पर लैंडर की सॉफ्ट लैंडिग होती है तो अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश बन जाएगा। यह मिशन 615 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। 'चंद्रयान-3' को भेजने के लिए LVM3-M4 रॉकेट का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्पेस एजेंसी इसरो ने इसी रॉकेट से चंद्रयान-2 को लॉन्च किया था। इसे पहले GSLV MK-III के नाम से जाना जाता था।

भारत की आशाओं को आगे बढ़ाएगा यह मिशन : PM

पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, जहां तक ​​भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की बात है तो 14 जुलाई 2023 हमेशा सुनहरे अक्षरों में अंकित रहेगा। आज हमारा तीसरा चंद्र मिशन चंद्रयान-3 अपनी यात्रा पर निकलेगा। हमारे राष्ट्र की आशाओं और सपनों को यह मिशन आगे बढ़ाएगा।

चंद्रयान-3 कैसे अलग है चंद्रयान-2 से?

चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर के बजाय स्वदेशी प्रोपल्शन मॉड्यूल है, जबकि चंद्रयान-2 में लैंडर, रोवर और ऑर्बिटर था। प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा की सतह पर चंद्रयान-3 के लैंडर-रोवर को छोड़कर, चांद की कक्षा में 100 किलोमीटर ऊपर चक्कर लगाता रहेगा। यह कम्यूनिकेशन के लिए है। चंद्रयान-3 का मकसद दुनिया को यह बताना है कि, भारत दूसरे ग्रह पर सॉफ्ट लैंडिंग करा सकता। वहां अपना रोवर चला सकता है। इसके साथ ही चांद की सतह, वायुमंडल और जमीन के अंदर होने वाली हलचलों का पता करना है। https://twitter.com/psamachar1/status/1679783170487599106?t=3nMQh3D2Z_Kav2vllAcfYg&s=08

कब-कब लॉन्च हुए चंद्रयान?

  • चंद्रयान-1 : साल 2008
  • चंद्रयान-2 : साल 2019
  • चंद्रयान-1 में सिर्फ ऑर्बिटर था, जबकि चंद्रयान-2 में ऑर्बिटर के साथ-साथ लैंडर और रोवर भी थे। वहीं चंद्रयान-3 में ऑर्बिटर नहीं होगा, सिर्फ लैंडर और रोवर ही रहेंगे।
  • इस बार भी इसरो ने लैंडर का नाम 'विक्रम' और रोवर का 'प्रज्ञान' रखा है। लैंडर और रोवर के चंद्रयान-2 में भी यही नाम थे।
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Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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