
विजय एस. गौर-भोपाल। यूनीसेफ में रीजनरेट फॉरेस्ट के लिए देशभर से सिर्फ मप्र की एंट्री खतरे में है, क्योंकि हर साल 50 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र में होने वाले 5 करोड़ पौधरोपण अटक गया है। वजह, सिर्फ इतनी है कि पौधरोपण सहित वन विकास के कामों को ठेका पर देने के लिए वन विभाग अड़ा है। वह भी तब, जब पूर्व वन मंत्री के दौर में शुरू हुई ठेकेदारी की कवायद को मौजूदा वनमंत्री ने रोक दिया है।
दरअसल, टेरीटोरियल पौधरोपण के लिए एक साल पहले ही तैयारी शुरू हो जाती है, जिसमें गड्ढे खोदने से लेकर खरपतवार हटाकर सुरक्षा के काम होते हैं। इसके अगले साल जून-जुलाई में मानसून सक्रिय होते ही रोपण होता है, जबकि भोपाल जैसे महानगरीय क्षेत्रों में बरसात से पहले ही गड्ढे खोदकर पौधरोपण होता है। इन्हीं कामों को पहली बार ठेका पर देने की प्रक्रिया तत्कालीन वनमंत्री विजय शाह के कार्यकाल में शुरू हुई, लेकिन आदेश 27 मार्च 2024 को जारी हुआ। इसमें निर्माण कार्यों को तत्काल निविदा से कराने के निर्देश हैं।
वनमंत्री ने रोक दी ठेका प्रक्रिया
वन मंत्री नागर सिंह चौहान ने एसीएस जेएन कांसोटिया को नोटशीट लिखी कि ठेका प्रथा शुरू करने से पहले विशेषज्ञ अफसरों की टीम ऐसे प्रदेशों में भेजी जाए, जहां ठेका प्रथा है। इस टीम की रिपोर्ट के बाद एक या दो जिलों में पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ही पूरे प्रदेश में लागू हो। दूसरी ओर, मुख्य सचिव वीरा राणा वन विभाग के सालाना 1,200 करोड़ रुपए के तिमाही बजट 300 करोड़ में से 10 प्रतिशत भी खर्च नही होने पर नाराजगी जता चुकी हैं। ठेकेदारी के चक्कर में बीते साल की तैयारी बेकार जा रही है तो मौजूदा साल में शुरूआत तक नहीं हो सकी है।
सीधी बातअसीम श्रीवास्तव, वन बल प्रमुख
- पौधरोपण का बीते और वर्तमान साल का काम क्यों रुका है ?
- अभी तो बीते साल का काम बिना ठेका के ही करवाएंगे। वैसे निविदा के माध्यम से काम कराने के आदेश पालन को लेकर विचार की स्थिति है। भोपाल सहित अन्य महानगरीय क्षेत्रों में पौधरोपण करवा लिया जाएगा।
- लेकिन आदेश में साफ है कि पौधरोपण सहित अन्य कार्यों को करवाने में तत्काल प्रभाव से ठेकेदारी प्रथा लागू होगी?
- देखिए अभी मैं कहीं बाहर हूं, चेक इन कर रहा हूं। बात नहीं कर सकता।
नोटशीट भेजी है, सीएम से भी चर्चा करेंगे
पौधरोपण सहित अन्य कार्यों को निविदा से कराने में गड़बड़ियां हैं। इसे स्थगित करके अन्य राज्यों के अध्ययन के लिए नोटशीट लिखी है। सीएम से भी चर्चा करेंगे। -नागर सिंह चौहान,मंत्री, वन