
गुना। जिले के ग्राम मावन निवासी एक युवक के साथ अमानवीय बर्ताव करने के दौरान उसे पेशाब पिलाने, गंजा कर महिलाओं के कपड़े पहनाने के बाद गांव में जुलूस निकालने वाले 4 आरोपियों का पुलिस ने शहर में जुलूस निकाल दिया है। वारदात में शामिल 7 में से 4 आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इन सभी को पुलिस अधिकारी भीषण गर्मी के बीच शहर के प्रमुख मार्गों से पैदल लेकर जिला कोर्ट पहंचे और जज के सामने पेश किया।
मारपीट कर युवक को पिलाई थी पेशाब
बता दें कि मावन निवासी महेंद्र बंजारा के खिलाफ 22 मई को राजस्थान निवासी 7 लोगों ने मारपीट की थी। महेंद्र को महिलाओं के कपड़े पहनाकर गांव में घुमाया गया था, उसे पेशाब पिलाई गई थी। महेंद्र बंजारा ने गुना एसपी को आवेदन देकर बताया था कि वह बर्बरता के चलते तनावग्रस्त है और आत्महत्या करने का विचार कर रहा है। एसपी संजीव कुमार सिन्हा के आदेश पर फतेहगढ़ थाने में महेंद्र को अपहृत करने का केस दर्ज किया गया था।
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आरोपियों में जीजा भी शामिल
आरोपियों में महेंद्र बंजारा का जीजा राकेश भी शामिल है। उसकी पत्नि घर से भाग गई थी। जिसके बदले आरोपी महेंद्र और उसके परिजनों से 20 लाख रुपए की मांग कर रहे थे। इसी को लेकर विवाद हुआ और आरोपियों ने बंजारा समुदाय में प्रचलित झगड़ा परम्परा का हवाला देते हुए महेंद्र के साथ बर्बरता की।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के मुताबिक, गुना जिले में रहने वाला महेंद्र बंजारा बमौरी ब्लॉक के भौंरा कॉलोनी क्षेत्र में मजदूरी कर रहा था। तभी उसकी चचेरी बहन का पति रमेश बंजारा उसे कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने ले गया। इसके बाद बारां जिले के जंगलों में ले जाकर 7 लोगों ने महेंद्र का मुंडन किया, उसे जूतों की माला पहनाई और पूरे गांव में घुमाया। बताया जा रहा है कि महेंद्र की चचेरी बहन की शादी रमेश के साथ हुई थी। रमेश की पत्नि घर से भाग गई। इसके बाद बंजारा समुदाय में प्रचलित झगड़ा प्रथा के तहत रमेश महेंद्र और उसके परिजनों से रुपयों की मांग कर रहा था। इसी को लेकर विवाद बढ़ा और महेंद्र को अपमानित करने के उद्देश्य से उसके साथ इस अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया।
मामले ने तूल पकड़ा तो गुना एसपी संजीव कुमार सिन्हा के निर्देश पर फतेहगढ़ थाने में अपहरण का मामला दर्ज किया गया। पुलिस वीडियो के आधार पर मामले की जांच कर रही है। बता दें कि, बंजारा समुदाय में झगड़ा प्रथा के मुताबिक अगर कोई महिला या पुरुष अपने जीवनसाथी के साथ नहीं रहना चाहते हैं तो उन्हें पंचायत के जरिए एक रकम तय कर पीड़ित पक्ष को देना होती है।