
कैश फॉर क्वेरी मामले में शुक्रवार को टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द कर दी गई। लोकसभा से बर्खास्त होने के दो दिन बाद अब महुआ ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने सोमवार को सदस्यता रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
प्रहलाद जोशी ने रखा था प्रस्ताव
कैश फॉर क्वेरी केस यानि पैसे लेकर संसद में सवाल पूछने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा सांसद पद से बर्खास्त कर दी गई। लोकसभा की एथिक्स कमिटी ने उनकी सदस्यता खत्म करने की सिफारिश की थी। शुक्रवार को समिति की रिपोर्ट पर लोकसभा में चर्चा हुई। चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी ने टीएमसी सांसद की सदस्यता रद्द करने का प्रस्ताव रखा। प्रस्ताव पारित होने के बाद उनकी संसद सदस्यता रद्द कर दी गई।
कारोबारी से पैसे लेने का मामला
महुआ मोइत्रा पर कारोबारी दर्शन हीरानंदानी से पैसे लेने के बदले संसद में सवाल पूछने के आरोप है। इसकी शुरुआत उस समय हुई जब बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में महुआ मोइत्रा पर पैसे लेकर सवाल पूछने का आरोप लगाया। दुबे ने संसद में सुप्रीम कोर्ट के वकील जय अनंत का वह पत्र भी दिखाया था, जिसमें दावा किया गया था कि महुआ और हीरानंदानी के बीच पैसों का लेनदेन हुआ था। आरोप के बाद महुआ ने बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे और जय अनंत को कानूनी नोटिस भेजा था। बाद में निशिकांत ने दावा किया कि महुआ ने अपनी सांसद वाली लॉगइन आईडी और पासवर्ड भी हीरानंदानी को बता रखा था, ताकि वह सीधे सवाल पूछ सकें।
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