
रायपुर। मध्यप्रदेश के पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में बीजेपी को आज करारा झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, आदिवासी चेहरे और सांसद डॉ नंदकुमार साय ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। साय ने प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष अरुण साव को भेजे इस्तीफे में पार्टी के ही राजनैतिक प्रतिद्वंदियों पर उनके खिलाफ षड्यंत्र रचने के गंभीर आरोप लगाए हैं। छत्तीसगढ़ की राजनीति में साय के इस्तीफे ने एकाएक हलचल पैदा कर दी है।
पार्टी नेताओं को ही ठहराया जिम्मेदार
साय ने अपने इस्तीफे में साफ लिखा है कि पार्टी के भीतर ही मौजूद कुछ नेता उनसे राजनैतिक प्रतिद्वंदिता रखते हैं और उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। उन्होंने खुलकर आरोप लगाया है कि पार्टी के चंद नेता ही उनकी छवि को धूमिल करने के साथ उनकी गरिमा को ठेस भी पहुंचा रहे हैं। इस्तीफे में साय ने साफ लिखा कि बहुत विचार के बाद वे मजबूर होकर इस्तीफा दे रहे हैं। इस्तीफे के बाद साय ने ट्वीट भी किया, जिसमें उन्होंने आत्मसम्मान की खातिर इस्तीफा देने की बात कही है। हालांकि साय ने इस्तीफे में किसी नेता का नाम नहीं लिखा।
लंबा राजनीतिक सफर रहा है साय का
नंदकुमार साय अविभाजित एमपी में 1977 में पहली बार विधायक बने, उसके बाद 1985 और 1998 में भी वे विधायक रहे। साय 1989, 1996 और 2004 में रायगढ़ लोकसभा सीट से सांसद भी रहे। वे छत्तीसगढ़ में 2000 में बनी जोगी सरकार के दौरान पहले नेता प्रतिपक्ष भी रहे। इसके साथ ही नंदकुमार साय राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। एक दौर में साय को छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा का सबसे मजबूत स्तंभ माना जाता था, लेकिन विगत कुछ समय से पार्टी में वे हाशिए पर चल रहे थे। हालांकि उन्हें बीजेपी ने उनके राजनीतिक अनुभव को देखते हुए उन्हें राज्यसभा सांसद जरूर बनाया था।
इस्तीफे के बाद चर्चाओं का दौर
नंदकुमार सिंह के इस्तीफे के बाद पार्टी में चिंतन का दौर शुरू हो गया है। इस्तीफे के बाद रमन सिंह रायपुर में बीजेपी प्रदेश कार्यालय पहुंचे और अरुण साव के साथ लंबी चर्चा की। पुर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने पत्रकारो से चर्चा में दावा किया कि नंदकुमार साय से लगातार बातचीत होती थी, लेकिन उन्होंने कभी इस्तीफे जैसी कोई बात नहीं की। रमन सिंह ने कहा कि साय वरिष्ठ नेता हैं, उनसे बातचीत करके रास्ता निकाला जाएगा।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अरुण साव ने साय के इस्तीफे पर कहा कि, यदि कोई गलतफहमी होगी तो उसे चर्चा के जरिए दूर कर उन्हें मना लिया जाएगा। बीजेपी की प्रदेश इकाई ने साय के इस्तीफे की जानकारी केंद्रीय नेतृत्व को भी दी है। बीजेपी में मची इस हलचल के बाद कांग्रेस को बीजेपी पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष मोहन मरकाम ने इसे आदिवासी नेताओ की उपेक्षा से जोड़ते हुए दावा किया कि भाजपा देश में आदिवासियों की उपेक्षा और शोषण कर रही है।
#रायपुर – चुनावी साल में #बीजेपी को बड़ा झटका, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और राज्यसभा सांसद #नंदकुमार_साय ने दिया पार्टी से इस्तीफा, पार्टी के ही राजनैतिक प्रतिद्वंदियों पर लगाया षड्यंत्र रचने का आरोप, इस्तीफे से मची छत्तीसगढ़ बीजेपी में खलबली
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