
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के रेप-मर्डर के बाद देश में महिला डॉक्टरों की सुरक्षा का मुद्दा बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने भी इसे लेकर कड़ा सवाल किया था। इसी बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने महिला सुरक्षा को लेकर एक ऑनलाइन सर्वे कराया है। सर्वे में हिस्सा लेने वाली 35% महिलाओं का मानना है कि वो रात की ड्यूटी के दौरान सुरक्षित महसूस नहीं करती हैं।
हैंडबैग में फोल्डेबल चाकू रखती हैं महिला डॉक्टर
सर्वे से जुड़ी एक महिला डॉक्टर ने बताया कि नाइट शिफ्ट में खुद की सुरक्षा के लिए हैंडबैग में फोल्डेबल चाकू और मिर्च स्प्रे रखती हैं। एक डॉक्टर ने बताया कि उन्हें भीड़भाड़ वाले इमरजेंसी रूम में बैड टच का सामना करना पड़ता है। वहीं, कुछ डॉक्टर ने इमरजेंसी रूम में उनके साथ गलत व्यवहार की शिकायत की है।
ऑनलाइन आयोजित कराया सर्वे
इस सर्वे को ऑनलाइन आयोजित कराया गया। इसमें देश भर के सरकारी और प्राइवेट मेडिकल डॉक्टरों को गूगल फॉर्म भेजे गए। इस सर्वे में 22 राज्यों के डॉक्टरों ने हिस्सा लिया है। नाइट ड्यूटी के दौरान दिक्कतों को साझा करते हुए महिला डॉक्टरों ने बताया कि नाइट शिफ्ट के दौरान ड्यूटी रूम नहीं मिला। ऐसा कहने वाली महिला डॉक्टरों की संख्या 45 प्रतिशत थी। साथ ही कुछ ने इसकी भी शिकायत की कि ड्यूटी रूम में अटैच बाथरूम की व्यवस्था नहीं होती और न ही महिला डॉक्टरों की प्राइवेसी के लिए ताले लगे होते हैं ताकि वो आराम कर सकें।
बुनियादी सुविधाओं के लिए सबसे अधिक चिंता
ऑनलाइन सर्वे में महिला डॉक्टरों ने सुरक्षा को लेकर खास चिंता जताई है और साथ ही सुझाव भी भेजे हैं। सुरक्षा को लेकर कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने, केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम को लागू करने, अलार्म सिस्टम और कैमरे से निगरानी जैसे तमाम सुझाव शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने महिला डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए 14 मेंबर्स की नेशनल टास्क फोर्स बनाई है। यह सुरक्षा, वर्किंग कंडीशन और उनकी बेहतरी के लिए नए उपाय देंगे।