IGKV में छात्रों का हल्लाबोल,5 सूत्री मांगों पर आंदोलन, ईयर बैक सिस्टम खत्म करने की उठी मांग

रायपुर: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में छात्र-छात्राओं ने परीक्षा मूल्यांकन और शैक्षणिक नियमों में बदलाव की मांग को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन किया। विद्यार्थियों ने उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच, संशोधित परिणाम जारी करने और ईयर बैक सिस्टम समाप्त करने सहित पांच सूत्री मांगें विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने रखीं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों की नारेबाजी ने भी ध्यान खींचा।

IGKV में पांच सूत्री मांगों को लेकर छात्रों का प्रदर्शन
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में छात्र-छात्राओं ने अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा परिणामों और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष पांच सूत्री मांगें रखीं।
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उत्तर पुस्तिकाओं की निष्पक्ष जांच और संशोधित रिजल्ट की मांग
आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों की प्रमुख मांग है कि उत्तर पुस्तिकाओं का निष्पक्ष तरीके से पुनर्मूल्यांकन किया जाए और आवश्यक होने पर संशोधित परीक्षा परिणाम जारी किए जाएं। छात्रों का कहना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता से विद्यार्थियों का भरोसा मजबूत होगा।

ईयर बैक सिस्टम खत्म करने की मांग
छात्रों ने ईयर बैक सिस्टम को पूरी तरह समाप्त करने और इस संबंध में स्पष्ट एवं स्थायी नियम बनाने की मांग उठाई। विद्यार्थियों के मुताबिक, शैक्षणिक नियमों में स्पष्टता जरूरी है, ताकि छात्रों को अपने भविष्य और पढ़ाई की योजना बनाने में परेशानी न हो।

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ग्रेस मार्क्स बढ़ाने और बुक रेफरेंस नियम हटाने की मांग
पांच सूत्री मांगों में ग्रेस मार्क्स बढ़ाने का मुद्दा भी शामिल है। इसके साथ ही विद्यार्थियों ने RTI के तहत उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में लागू बताए जा रहे ‘बुक रेफरेंस’ नियम को समाप्त करने की मांग की। छात्रों का कहना है कि इन विषयों पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
नारेबाजी से जताई नाराजगी, चर्चा में आया छात्रों का स्लोगन
प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों ने नारेबाजी कर अपनी नाराजगी जाहिर की। इस दौरान दिल्ली में हुए एक प्रदर्शन के दौरान चर्चित नारे की तर्ज पर छात्रों ने कहा— “एक कचौरी, दो समोसा, इस फैकल्टी का क्या भरोसा।” इस नारे के जरिए विद्यार्थियों ने अपनी नाराजगी को अलग अंदाज में सामने रखा।
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अब विश्वविद्यालय प्रशासन के रुख पर नजर
छात्रों का कहना है कि उनकी मांगें सीधे तौर पर छात्र हितों, परीक्षा परिणामों और शैक्षणिक व्यवस्था से जुड़ी हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन को इन पर विचार कर स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए। फिलहाल, आंदोलन के बाद प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और मांगों पर आगे होने वाली कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।




















