
बर्लिन। जर्मनी की राजनीति में बड़ा उथल-पुथल देखने को मिला है। चांसलर ओलाफ शोल्ज के खिलाफ संसद के निचले सदन बुंडेस्टाग में अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया है। इस प्रस्ताव के बाद जर्मनी में संसद भंग करने और जल्द ही नए आम चुनाव कराने की अपील की गई है।
वोटिंग में शोल्ज को नहीं मिला बहुमत
733 सीटों वाले बुंडेस्टाग में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर मतदान हुआ। इसमें 394 सदस्यों ने चांसलर शोल्ज के खिलाफ वोट दिया, जबकि 207 सांसदों ने उनका समर्थन किया। इसके अलावा 116 सांसदों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। शोल्ज को बहुमत में बने रहने के लिए 367 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता थी, लेकिन वे इस आंकड़े को हासिल करने में असफल रहे।
क्या होगी आगे की प्रक्रिया
वोटिंग के नतीजों के बाद चांसलर ओलाफ शोल्ज ने जर्मन राष्ट्रपति फ्रांक वाल्टर श्टाइनमायर से संसद भंग करने और नए चुनाव कराने की अपील की है। जर्मन संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति को 21 दिनों के भीतर संसद को भंग कर देना होगा। इसके बाद 60 दिनों के भीतर देश में नए सिरे से आम चुनाव कराए जाएंगे। अगर ऐसा होता है तो जर्मनी में तय समय से सात महीने पहले चुनाव होंगे।
बजट कटौती पर विवाद से टूटा गठबंधन
इस राजनीतिक संकट की जड़ नवंबर में शुरू हुई, जब चांसलर शोल्ज ने अपने वित्त मंत्री क्रिश्चियन लिंडनर को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद उनकी SDP पार्टी का ग्रीन्स पार्टी और फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी से गठबंधन टूट गया। गठबंधन टूटने की मुख्य वजह 2025 के संघीय बजट को लेकर था। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते जर्मनी की अर्थव्यवस्था दबाव में है। चांसलर शोल्ज देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए अधिक कर्ज लेने के पक्ष में थे, जबकि वित्त मंत्री लिंडनर खर्च में कटौती पर जोर दे रहे थे।
कैसे चुना जाता है जर्मनी का चांसलर
भारत की तरह जर्मनी में भी संसदीय लोकतंत्र है, लेकिन चांसलर का चुनाव प्रक्रिया अलग है। जर्मनी में चुनाव से पहले हर पार्टी को चांसलर पद के लिए अपने उम्मीदवार का नाम घोषित करना जरूरी होता है। चुनाव जीतने के बाद उस उम्मीदवार को संसद में बहुमत साबित करना होता है।
ये भी पढ़ें- भोपाल : चार साल की बच्ची के साथ बैड टच का मामला, चॉकलेट के बहाने साथ ले जा रहा युवक