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छत्तीसगढ़ : चंपारण पहुंचे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, आप जानते हैं महाप्रभु वल्लभाचार्य का ये मंदिर क्यों है खास

रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने छत्तीसगढ़ में रायपुर जिले के चंपारण में महाप्रभु वल्लभाचार्य आश्रम में शनिवार को पूजा-अर्चना की। शाह के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं पार्टी के अन्य नेता मौजूद थे। अधिकारियों ने बताया कि शाह ने यहां प्राकट्य बैठकजी मंदिर और चंपेश्वर महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की। शाह तीन दिवसीय दौरे पर शुक्रवार रात यहां पहुंचे, जहां सीएम विष्णु देव साय और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों तथा भाजपा के नेताओं ने उनका स्वागत किया।

चंपारण रायपुर से लगभग 40 किमी दूर वल्लभ संप्रदाय के संस्थापक महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली है। क्या आप इस मंदिर की विशेषस्ताएं जानते है ?

3 दिन रायपुर में अमित शाह

अमित शाह के साथ गृह मंत्रालय के आला अफसर भी रायपुर पहुंचे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री तीन दिन तक रायपुर में ही रहेंगे। शाह गृह विभाग की हर छोटी-बड़ी अपडेट रायपुर से ही लेंगे। आस-पास के राज्यों में नक्सल मूवमेंट की रिपोर्ट भी अफसरों से गृह मंत्री लेने वाले हैं।

NCB कार्यालय का करेंगे उद्घाटन

शाह 25 अगस्त की सुबह रायपुर में स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (NCB) कार्यालय का उद्घाटन करेंगे तथा समीक्षा बैठक में भाग लेंगे। इसके बाद दोपहर में वह छत्तीसगढ़ में सहकारिता के विस्तार से संबंधित बैठक में शामिल होंगे। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लगातार तीसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के बाद शाह का यह राज्य का पहला दौरा है।

अब तक 142 नक्सलियों को किया ढेर

छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियान में तेजी आई है। इस वर्ष अब तक राज्य में अलग-अलग मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों ने 142 नक्सलियों को मार गिराया है।

क्यों खास ये हैं मंदिर

जगद्गुरु की उपाधि प्राप्त महाप्रभु वल्लभाचार्य के देशभर में 84 बैठकें हैं, जहां उन्होंने श्रीमद्भागवत गीता का पारायण किया था। इनमें से प्रमुख बैठक मंदिर चंपारण्य को माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि महाप्रभु ने अपने जीवनकाल में तीन बार धरती की परिक्रमा की थी। यहां पूजा-अर्चना के सारे नियम-धरम का पालन उसी तरह किया जाता है, जिस तरह से बृज के मंदिरों में पालन होता है। चंपारण्य के मंदिर भी बृजस्थलों में बने मंदिर की तर्ज पर बनाए गए हैं।

बताते हैं कि वल्लभाचार्य ने संतान के रूप में जन्म लिया था, चूंकि 8वें माह में ही उनका जन्म हुआ था, इसलिए जन्म के समय उन्होंने कोई हलचल नहीं की तो माता-पिता ने उन्हें मृत समझकर जंगल में ही पत्तों से ढंककर चले गए। लेकिन रात में श्रीनाथजी ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा कि तुम्हारी कोख से मैंने जन्म लिया है। सुबह उठते ही वे वापस चंपेश्वर धाम लौटे तो देखा कि बालक अग्नि कुंड में अंगूठा चूस रहा है। अग्नि कुंड के चारों ओर औघड़ बाबा भी बैठे थे। औघड़ बाबाओं को यकीन नहीं हुआ कि बालक उस दंपति का पुत्र है।

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