
भोपाल। चुनावी साल में भी मध्य प्रदेश में नाम बदलने का सिलसिला जारी है। वहीं अब राजधानी भोपाल में एक और मुगलकालीन नाम को बदला गया है। बरखेड़ा पठानी का नाम बदलकर अब पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाम पर शास्त्री नगर रखा गया है।
इस पर बुधवार को प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि जो गुलामी के प्रतीक हैं और जो गुलामी की याद दिलाते हैं उनके नाम परिवर्तित होना ही चाहिए। वहीं भोपाल का नाम बदलने के लेकर भी बड़ी बात कही है।
इसे किसी धर्म से या वर्ग न जोड़ें : मंत्री सारंग
बरखेड़ा पठानी का नाम लाल बहादुर शास्त्री करने पर मंत्री सारंग ने कहा कि नाम बदलने की प्रक्रिया को किसी धर्म से या वर्ग विशेष से जोड़कर न देखा जाए। उन्होंने कहा कि जो गुलामी के प्रतीक हैं और जो गुलामी की याद दिलाते हैं उनके नाम परिवर्तित होना ही चाहिए। भोपाल के बरखेड़ा पठानी का नाम लाल बहादुर शास्त्री जी के नाम पर रखा गया है। शास्त्री जी ने देश की एकता अखंडता और आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। देश की आजादी के बाद प्रधानमंत्री के रूप में सुचिता की राजनीति को आगे बढ़ाया है।
मुगलों ने इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा है : मंत्री सारंग
मंत्री सारंग ने कहा कि मुगलों ने आकर जगदीशपुर का नाम बदलकर इस्लामनगर कर दिया था। हमने उसका नाम दोबारा जगदीशपुर करने का काम किया है। मुगलों ने हिंदुस्तान को केवल भौतिक रूप से ही गुलाम नहीं बनाया था। बल्कि, मानसिक रूप से भी गुलाम बनाना चाहते थे। उन्होंने इतिहास को तोड़ा-मरोड़ा।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) April 26, 2023
मंत्री सारंग बोले- मैंने ही भोपाल का नाम भोजपाल करने की उठाई थी मांग
मंत्री सारंग ने कहा कि ये भोपाल राजा भोज और रानी कमलापति का था ना कि मुगलों का। मुगलों ने इतिहास को तोड़ा मरोड़ा इसलिए उस इतिहास को ठीक करना आगे आने वाली पीढ़ी को सही जानकारी देना यह हमारा दायित्व है और कर्तव्य है जिसे हम कर रहे हैं।
भोपाल का नाम भोजपाल करने पर मंत्री सारंग ने कहा कि सबसे पहले मैंने ही यह मांग उठाई थी। लेकिन, कांग्रेस की सरकार ने इस मांग को रिजेक्ट कर दिया था। आने वाले समय में इस पर हमारी सरकार विचार करेगी।
इनका भी बदला गया नाम
इससे पहले भी मध्य प्रदेश सरकार ने हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति रेलवे स्टेशन और इस्लाम नगर का बदलकर जगदीशपुर कर किया था। अप्रैल महीने में ही सीहोर जिले के नसरुल्लागंज का नाम बदलकर भैरूंदा कर दिया गया।