
श्योपुर। कूनो नेशनल पार्क से भटकने के बाद नर चीता ‘ओबन’ पड़ोसी जिले शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क (एमएनपी) में पहुंच गया है। इसके बाद अब कूनो नेशनल पार्क के साथ-साथ माधव नेशनल पार्क प्रबंधन भी चीते की चौकसी में जुट गया। गौरतलब है कि माधव राष्ट्रीय उद्यान में हाल ही में दो बाघों को छोड़ा गया है।
वन विभाग के एक अधिकारी ने मंगलवार को बताया कि चीते का पड़ोसी जिले के जंगल में प्रवेश करना प्राकृतिक प्रक्रिया है। इस महीने में यह दूसरी बार है जब पिछले साल नामीबिया से कूनो में लाए गए 8 चीतों में से एक पांच साल का ‘ओबन’ कूनो से भटक गया है।

माधव नेशनल पार्क की सीमा में ओबन की एंट्री
वन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक, ओबन रविवार से कूनो पार्क से बाहर है। उन्होंने बताया कि इससे पहले, वह दो अप्रैल को भी कूनो से बाहर निकला था और चार दिन बाद शिवपुरी जिले के बैराड़ से उसे वापस लाया गया था। कूनो के वन मंडल अधिकारी (डीएफओ) प्रकाश कुमार वर्मा ने कहा कि शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क में मंगलवार को ‘ओबन’ की हलचल दर्ज की गई।
बाघ और चीता में संघर्ष हो सकता है या नहीं ?
गौरतलब है कि इस साल मार्च में, बाघों की आबादी को बढ़ाने और उनके संरक्षण के लक्ष्य से माधव नेशनल पार्क में एक बाघ और बाघिन को छोड़ा गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या माधव पार्क में बाघों की मौजूदगी के कारण दोनों (बाघ और चीता) में संघर्ष हो सकता है, वर्मा ने कहा, माधव पार्क में बाघ हैं, लेकिन इससे कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि सभी जानवर खतरे को देखते हुए अपनी रक्षा कर सकते हैं।
नामीबिया-दक्षिण अफ्रीका से लाए थे चीते
गौरतलब है कि पिछले साल 17 सितंबर को नामीबिया से 8 चीते कूनो लाए गए थे। वहीं इस साल 18 फरवरी को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को यहां लाया गया। इनमें से एक चीते की किडनी के समस्या के चलते मौत हो गई है। वहीं मादा चीता ‘साशा’ के अंतिम संस्कार के एक दिन बाद ही दूसरी मादा चीता ‘सियाया’ ने चार शावकों को जन्म दिया था। यह भारतीय भूमि पर 1947 के बाद जन्मे चीता के पहले चार शावक हैं।
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