
काठमांडू। नेपाल में शुक्रवार रात आए 6.4 तीव्रता के भूकंप ने काफी तबाही मचाई है। इसमें अब तक 128 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। ऐसे में मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है। नेपाल में दो जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें रुकुम पश्चिम में 36 और 92 लोगों ने जाजरकोट में जान गंवाई। भूकंप का असर भारत में भी देखने को मिला। हालांकि, भारत में भूकंप से अभी तक किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
कई इमारतें हुईं तबाह
नेपाल में शुक्रवार रात करीब 11:32 बजे 6.4 तीव्रता का भूकंप आया। इसका केंद्र काठमांडू से 331 किमी उत्तर-पश्चिम में 10 किमी जमीन के नीचे था। DIG कुवेर कडायतेन के मुताबिक, इसमें नलगढ़ नगर पालिका की डिप्टी मेयर सरिता सिंह समेत अब तक 128 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। भूकंप की वजह से कई इमारतें ढह गईं। नेपाल में एक महीने में तीसरी बार तेज भूकंप आया है।

भूकंप प्रभावितों के लिए खुले सेना के अस्पतालों दरवाजे
नेपाल में राहत और बचाव कार्य जारी है। घायलों की रक्षा के लिए सरकार ने नेपाल के भेरी अस्पताल, कोहलपुर मेडिकल कॉलेज, नेपालगंज सैन्य अस्पताल और पुलिस अस्पताल को भूकंप प्रभावितों के लिए ओपन कर दिया है।
भारत में भी महसूस किए गए झटके
नेपाल में आए इस भूकंप के झटके दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और बिहार की राजधानी पटना में भी महसूस किए गए।
मध्य प्रदेश : भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, सतना और रीवा में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। इसके अलावा आगर मालवा और मुरैना जिले के कुछ हिस्सों में भी धरती में कंपन महसूस किया गया।
बिहार : पटना समेत आरा, दरभंगा, गया, वैशाली, खगड़िया, सिवान, बेतिया, बक्सर, बगहा, नालंदा, नवादा 11 जिलों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। कई बार आफ्टर शॉक्स भी महसूस किए गए।
हरियाणा : गुरुग्राम सहित कई इलाकों में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
उत्तर प्रदेश : राजधानी लखनऊ, गाजियाबाद, आगरा, कासगंज सहित कई जिलों में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए।
2015 में आए भूकंप में हुई थी 9000 लोगों की मौत
हिमालयी देश नेपाल में भूकंप आना आम बात है। साल 2015 में नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इसमें करीब 9,000 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 22,000 से अधिक लोग घायल हो गए थे। वहीं 5 लाख से अधिक घर तबाह हो गए थे। भूकंप का एपिसेंटर लामजंग से करीब 34 किमी पूर्व-दक्षिण पूर्व और काठमांडू से 77 किमी उत्तर-पश्चिम में था। इसकी गहराई करीब 15 किमी थी।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप ?
भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।
कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।
किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है
• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में पाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।
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