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हिंडनबर्ग के आरोपों पर SEBI चीफ माधबी बुच की सफाई, "आरोप निराधार, हमारी जिंदगी खुली किताब"

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हिंडनबर्ग के आरोपों पर SEBI चीफ माधबी बुच की सफाई, "आरोप निराधार, हमारी जिंदगी खुली किताब"
बिजनेस डेस्क। अमेरिकी कंपनी हिंडनबर्ग के आरोपों को SEBI की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने "निराधार" और "चरित्र हनन" का प्रयास बताया है। दरअसल, हिंडनबर्ग ने शनिवार को सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की चेयरपर्सन पर गंभीर आरोप लगाए। उसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि, माधबी बुच और उनके पति की अडाणी ग्रुप से जुड़ी ऑफशोर कंपनी में हिस्सेदारी है। SEBI चेयरपर्सन ने सभी फाइनेंशियल रिकॉर्ड डिक्लेयर करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने अपने पति धवल बुच के साथ एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा कि, 'हमारा जीवन और फाइनेंसेस एक खुली किताब है।'

माधबी बुच ने आरोपों को किया खारिज

सेबी की चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रविवार सुबह एक बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि, 10 अगस्त को आई हिंडनबर्ग रिपोर्ट में लगाए गए आरोप आधारहीन हैं और इनमें किसी भी तरह की कोई सच्चाई नहीं है। हमारा जीवन और फाइनेंस खुली किताब की तरह है। हमें जो भी खुलासे करने की जरूरत थी, वो सारी जानकारियां बीते सालों में सेबी को दी गई हैं। उन्होंने आगे कहा कि, "हमें किसी भी और वित्तीय दस्तावेजों का खुलासा करने में कोई झिझक नहीं है, जिसमें वो दस्तावेज भी शामिल हैं, जो उस अवधि से संबंधित हैं जब हम पूरी तरह से आम नागरिक थे। इन्हें कोई भी अधिकारी मांग सकता है।'' उन्होंने कहा है, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस हिंडनबर्ग रिसर्च के खिलाफ सेबी ने प्रवर्तन कार्रवाई की थी और कारण बताओ नोटिस जारी किया था। हिंडनबर्ग रिसर्च ने उसी के जवाब में हमारा नाम खराब करने, हमारे चरित्र हनन की कोशिश की है।" उन्होंने कहा है कि मामले की पूरी पारदर्शिता के लिए हम उचित समय पर पूरा बयान जारी करेंगे।

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में क्या है

हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया कि, सेबी की चेयरपर्सन माधबी बुच और उनके पति की अडाणी मनी साइफनिंग घोटाले में इस्तेमाल किए गए दोनों अस्पष्ट ऑफशोर फंडों में हिस्सेदारी थी। हिंडनबर्ग की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि, हमें अडाणी ग्रुप पर सबूत पेश किए लगभग 18 महीने हो गए हैं। हमारी रिपोर्ट में ऑफशोर में मुख्य रूप से मॉरीशस-आधारित शेल कंपनियों के एक बड़े नेक्सेस का खुलासा किया गया था। इन कंपनियों का उपयोग संदिग्ध अरबों डॉलर के अघोषित संबंधित पार्टी ट्रांजेक्शन, अघोषित निवेश और स्टॉक हेरफेर के लिए किया जाता था। हिंडनबर्ग रिपोर्ट में आगे लिखा कि- हमारी रिपोर्ट की पुष्टि और विस्तार करने वाले 40 से अधिक स्वतंत्र मीडिया जांचों के साथ-साथ सबूतों के बावजूद भारतीय प्रतिभूति नियामक यानी सेबी ने अडाणी समूह के खिलाफ कोई सार्वजनिक कार्रवाई नहीं की है। इसके बजाय 27 जून, 2024 को सेबी ने हमें एक ‘कारण बताओ’ नोटिस भेजा। सेबी ने हमारे 106 पेज के विश्लेषण में किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि का आरोप नहीं लगाया। बल्कि यह कहा कि जो भी सबूत दिए गए वो अपर्याप्त थे।

माधबी और पति का खाता

हिंडनबर्ग ने कहा, मौजूदा सेबी प्रमुख माधबी और उनके पति धवल के पास उसी अस्पष्ट ऑफशोर बरमूडा और मॉरीशस फंड में सीक्रेट हिस्सेदारी थी, जिसका उपयोग विनोद अडाणी ने किया था। व्हिसिलब्लोअर दस्तावेजों के अनुसार लगता है कि माधबी और धवल ने पहली बार 5 जून, 2015 को सिंगापुर में आईपीई प्लस फंड 1 के साथ अपना खाता खोला था। इसमें दंपति का कुल निवेश 10 मिलियन डॉलर आंका गया है। एगोरा एडवाइजरी में हिस्सेदारी : हिंडनबर्ग ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के रिकॉर्ड की एक प्रति भी पेश की। इसके मुताबिक सेबी प्रमुख के पास एगोरा एडवाइजरी कंसल्टेंसी बिजनेस में 99 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जहां उनके पति एक निदेशक हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2022 में इस इकाई ने कंसल्टेंसी से 2,61,000 डॉलर का राजस्व प्राप्त किया।

सेबी ने प्रोटेक्ट किया सोशल मीडिया अकाउंट

हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद सेबी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपना अकाउंट प्रोटेक्ट कर दिया। आम लोग उस अकाउंट तक नहीं पहुंच पा रहे थे।

2023 में किया था खुलासा

हिंडनबर्ग रिसर्च की यह रिपोर्ट लगभग उस रिपोर्ट के 18 महीने बाद आई है, जब इसने पहली बार अडाणी ग्रुप पर आरोप लगाए थे। हिंडनबर्ग ने 24 जनवरी, 2023 को अडाणी ग्रुप पर शेयरों में हेरफेर और ऑडिटिंग फ्रॉड का आरोप लगाते हुए एक रिपोर्ट प्रकाशित की और इसे कॉरपोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया था। हालांकि, बंदरगाहों से लेकर ऊर्जा कारोबार में शामिल अडाणी ग्रुप ने इन सभी आरोपों से इनकार किया था। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई या कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग खारिज कर दी थी। जिसके बाद अडाणी ग्रुप ने कहा था कि सच की जीत हुई है।

जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है...

अमेरिकी शॉर्ट सेलर फर्म हिंडनबर्ग रिसर्च ने शनिवार (10 अगस्त) को अपनी एक पोस्ट में लिखा कि, “भारत में जल्द ही कुछ बड़ा होने वाला है।“

अडाणी ग्रुप को लगा था जोर का झटका

कंपनी ने पिछले साल अडाणी ग्रुप को लेकर रिपोर्ट पब्लिश की थी। इसमें ग्रुप पर शेयरों की कीमत में हेरफेर समेत कई तरह के गंभीर आरोप लगाए गए थे। इसके चलते अडाणी समूह को करारा झटका लगा था। यहां तक कि कंपनी के शेयर के दाम काफी तेजी से गिर गए थे। पिछले साल हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट अडाणी ग्रुप की फ्लैगशिप कंपनी अडाणी एंटरप्राइजेज की शेयर बिक्री से ठीक पहले जारी की गई थी। अब हिंडनबर्ग ने एक बार फिर से बड़े खुलासे का संकेत दिया है। हालांकि ये तय है कि इसका संबंध किसी बड़ी भारतीय कंपनी से हो सकता है, हालांकि हिंडनबर्ग ने यह बात किस इंडियन ग्रुप को लेकर कही है, इसका खुलासा नहीं किया है।

क्या थी अडाणी ग्रुप रिपोर्ट

पिछले साल 24 जनवरी को हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडाणी ग्रुप के शेयरों को लेकर रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें यह दावा किया गया था कि अडाणी ग्रुप के शेयरों के दाम उसकी एक्चुअल वैल्यू से कहीं ज्यादा हैं। इसके साथ ही रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत के इस बड़े व्यापारिक समूह ने टैक्स हैवन्स का गलत इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया था कि अडाणी ग्रुप भारी कर्ज में हैं। अडाणी समूह ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आते ही इसे नकारते हुए भ्रामक करार दिया था। इसे पूरी दुनिया में भारत की छवि को धूमिल करने की साजिश करार दिया था। अडाणी की सफाई के बाद भी मामला ठंडा नहीं हुआ और SEBI और सुप्रीम कोर्ट को इस केस में दखल देना पड़ा।

एक तिहाई रह गई थी अडाणी की संपत्ति

हिंडनबर्ग रिसर्च ने जब यह रिपोर्ट जारी की, तब गौतम अडाणी दुनिया के 5 वें सबसे रईस थे। उस समय उनकी संपत्ति 120 अरब डॉलर थी, जो रिपोर्ट आने के बाद घट कर महज 39.9 अरब डॉलर रह गई। अडाणी समूह के बाजार मूल्य में 80 अरब डॉलर की भारी-भरकम गिरावट दर्ज की गई। अडाणी समूह के शेयरधारकों को इससे करोड़ों का नुकसान भी हुआ था। इस रिपोर्ट के चलते कंपनी आज तक अपने खोए हुए स्थान को पाने में जुटी हुई है। हालांकि आज तक अडाणी समूह का वैल्युएशन पहले जितनी मजबूत नहीं हो पाया है।

कई कंपनियों को लेकर भंडाफोड़

हिंडनबर्ग रिसर्च फर्म की शुरुआत नाथन एंडरसन ने 2017 में की थी। एंडरसन ने यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टीकट से इंटरनेशनल बिजनेस में डिग्री लेने के बाद एक रिसर्च कंपनी में काम किया। वहां उनका काम इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट कंपनियों से जुड़ा हुआ था। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि रिसर्च को लेकर काम-चलाऊ काम जारी है। हिंडनबर्ग अब तक कम से कम 36 कंपनियों में गड़बड़ी का भंडाफोड़ कर चुकी है। अमेरिका स्थित ऑटो सेक्टर की बड़ी कंपनी निकोला को लेकर हिंडनबर्ग ने सबसे चर्चित रिपोर्ट पब्लिश की थी। रिपोर्ट के बाद निकोला के शेयर 80 फीसदी तक टूट गए थे। हिंडनबर्ग रिसर्च ने इस रिपोर्ट के लिए निकोला कंपनी के पूर्व कर्मचारियों की मदद ली थी। जिसके बाद कंपनी के संस्थापक और कार्यकारी अध्यक्ष ट्रेवर मिल्टन को तुरंत इस्तीफा देना पड़ा था। ये भी पढ़ें- हिंडनबर्ग का आरोप, सेबी प्रमुख माधबी के पास अडाणी घोटाले के ऑफशोर फंड में थी हिस्सेदारी ये भी पढ़ें- “अडानी” के बाद किसकी बारी…! हिंडनबर्ग ने दी चेतावनी
Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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