
रूस यूक्रेन जंग का आज 42वां दिन है। इसी बीच ‘बूचा नरसंहार’ पर भारत की सामने प्रतिक्रिया आई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने ‘बूचा नरसंहार’ की निंदा की और इसकी स्वतंत्र जांच की मांग का समर्थन भी किया है। बूचा के लोगों का दावा है कि रूसी सेना ने वहां करीब 400 लोगों को बर्बरता के साथ मौत के घाट उतार दिया है।
बूचा की रिपोर्ट परेशान करने वाले
भारत के राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने UNSC की बैठक कहा- बूचा में नागरिकों की मौत वाली खबरें काफी परेशान करने वाली हैं। भारत बूचा हत्याओं की निंदा करता है और एक स्वतंत्र जांच के आह्वान का समर्थन करता है। हालांकि इस दौरान उन्होंने रूस का नाम नहीं लिया। बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध पर अबतक भारत ने अपना न्यूट्रल स्टैंड कायम रखा है। भारत बार-बार बातचीत के जरिए मसले को सुलझाने की अपील कर रहा है।
कूटनीति ही एकमात्र रास्ता
भारत के राजदूत टी एस तिरुमूर्ति ने यूक्रेन जंग पर कहा कि भारत जंग और शत्रुता खत्म करने के अपने आह्वान को दोहराता है। जब निर्दोष लोगों की जान दाव पर लगी हो तो सिर्फ कूटनीति ही एकमात्र विकल्प रह जाता है।
यूक्रेनियों की मदद को तैयार भारत
टीएस तिरुमूर्ति ने कहा कि- यूक्रेन में गंभीर मानवीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए, भारत यूक्रेन और उसके पड़ोसियों को मानवीय मदद भेज रहा है, जिसमें दवाएं और अन्य आवश्यक राहत सामग्री शामिल हैं। हम आने वाले दिनों में यूक्रेन को और ज्यादा चिकित्सा आपूर्ति देने के लिए तैयार हैं।
जेलेंस्की का भी संबोधन हुआ
सुरक्षा परिषद की बैठक में यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का संबोधन भी हुआ था। जेलेंस्की ने कहा था कि हमें यूक्रेन में शांति के लिए सुरक्षा परिषद के फैसलों की जरूरत है। रूस को सुरक्षा परिषद से बाहर किया जाए या फिर यूएनएससी को ही भंग कर दिया जाना चाहिए। रूसी बलों ने कीव के समर्थन में खड़े लोगों को बेरहमी से चुन-चुनकर मार डाला। इन हत्याओं की जवाबदेही अब अनिवार्य रूप से तय होनी चाहिए।
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