इंदौरताजा खबरमध्य प्रदेश

एसजीएसआईटीएस कॉलेज में मियावाकी पद्धति से तैयार जंगल की ड्रोन से निगरानी

25 प्रकार की तितलियां और चिड़ियों की 12 प्रजातियों ने यहां बनाया बसेरा

प्रभा उपाध्याय-इंदौर। श्री गोविंदराम सेकसरिया प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान (एसजीएसआईटीएस) कॉलेज में चार महीने पहले एक एकड़ के एरिया में मियावाकी पद्धति से जंगल तैयार किया गया था। 40 किमी. की दूरी में विलुप्त हो रहे वृक्षों को इस जंगल में स्थान दिया गया था। इस प्रकार के करीब 8175 पौधे लगाए गए थे। मियावकी पद्धति से तैयार इस जंगल में साढ़े पांच माह में पौधे 6 से 8 फीट तक के हो चुके हैं। डेढ़ से दो साल में यह जंगल बनकर तैयार हो जाएगा।

मियावाकी जंगल में पौधरोपण करने के पहले पूरी जमीन को एक फीट खोदी गई है। इसके बाद इस पर बायोमास डाला गया। इसमें भूसा और गोबर डाला गया। जिससे यह आगे चलकर बायोखाद का काम करती है। यह कठोर जमीन को नर्म करने का काम करती है, जिससे पौधे तेजी से ग्रोथ करते हैं। इस जंगल में 15 से 20 सांप आ गए हैं। वहीं 25 प्रकार की तितलियां और 12 प्रकार की चिड़ियों ने अपना रैन बसेरा यहां बना लिया है।

मियावाकी फॉरेस्ट घना होने के कारण ड्रोन से निगरानी की पड़ी जरूरत

मियावाकी फॉरेस्ट थोड़ा घना होता है। ऐसे में उसके भीतर जाकर निगरानी करना मुमकिन नहीं होता है। इसी के चलते फॉरेस्ट तैयार करते समय पेड़ों पर नंबर की टैगिंग की गई थी। इससे ड्रोन से पेड़ों की निगरानी करना आसान रहेगा। ड्रोन से पूरे जंगल का मुआयना किया जाएगा कि कौन सा पौधा सूख रहा है या कौन से पौधे में फल या फूल आने लगे हैं। उसी हिसाब से वहां पानी व अन्य आवश्यक सामग्री का छिड़काव किया जाएगा, ताकि जंगल में एक भी पौधा सूख या नष्ट न हो पाए। इस ड्रोन को अगले माह से शुरू किया जाएगा। । इस ड्रोन को सीड बाल ड्रापिंग और पार्सल डिलिवरी के लिए भी प्रयोग किया जा सकेगा।

15 मीटर की ऊंचाई पर जाने में होगा सक्षम

एसजीएसआइटीएस के डायरेक्ट डॉ आरके सक्सेना ने बताया कि बायोमेडिकल इंजीनियरिंग विभाग के तृतीय वर्ष द्वारा ड्रोन तैयार किया जा रहा है। इस ड्रोन को लगभग 70 हजार से लेकर दो लाख रुपये की लागत में तैयार किया जाएगा। यह ड्रोन 15 मीटर की ऊंचाई पर जाने में सक्षम रहेगा। इसे मैनुअली उड़ाया जाएगा।

संबंधित खबरें...

Back to top button