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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद : 16 अक्टूबर को होगी सुनवाई, रिकॉल अर्जी पर हुई बहस

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह विवाद मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी। सोमवार को जब इस मामले में सुनवाई शुरू हुई तो अदालत को बताया गया कि कुछ मुकदमों में संशोधन पर आपत्तियां दाखिल नहीं की गई हैं। सोमवार को मुस्लिम पक्ष की री कॉल अर्जी पर करीब आधे घंटे चली सुनवाई के बाद जस्टिस मयंक कुमार जैन ने यह आदेश सुनाया।

एक साथ सुनवाई को दी थी चुनौती

मुकदमों में संशोधन की यह मांग हिंदू पक्ष की ओर से की गई है। वहीं मुस्लिम पक्ष की ओर से 11 जनवरी, 2024 के आदेश को वापस लेने की मांग के साथ एक आवेदन दाखिल किया गया है। इसी आदेश के तहत सभी 18 मुकदमों पर एक साथ सुनवाई की जा रही है। इससे पहले 25 सितंबर को कोर्ट ने रिकॉल प्रार्थना पत्र पर मंदिर पक्षकारों को जवाब दाखिल करने का समय दिया था। मस्जिद पक्ष ने याचिकाओं को एक साथ सुने जाने के फैसले को चुनौती दी है।

मस्जिद पक्ष की अलग सुनवाई की मांग

जस्टिस मयंक कुमार जैन की अदालत इस मामले की सुनवाई कर रही है। मस्जिद पक्ष चाहता है कि सभी मामलों को अलग-अलग सुना जाए। वहीं कोर्ट सभी सिविल वादों की एकसाथ सुनवाई करने का फैसला दे चुका है। रिकॉल एप्लिकेशन पर मंदिर पक्ष का जवाब न दाखिल होने की वजह से इस पर बहस नहीं हो सकी थी।

जस्टिस ने जैन ने एक अगस्त 2024 को हिंदू पक्ष के मुकदमों को चुनौती देने वाले मुस्लिम पक्ष के आवेदन खारिज कर दिए थे और कहा था कि हिंदू पक्ष के सभी मुकदमे पोषणीय (सुनवाई योग्य) हैं। अदालत ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि ये मुकदमे समय सीमा, वक्फ अधिनियम और पूजा स्थल अधिनियम, 1991 से बाधित नहीं हैं। पूजा स्थल अधिनियम किसी भी धार्मिक ढांचे को जो 15 अगस्त, 1947 को मौजूद था, उसे परिवर्तित करने से रोकता है।

हिंदू पक्ष ने दाखिल किए 18 मुकदमे

हिंदू पक्ष ने शाही ईदगाह मस्जिद का ढांचा हटाने के बाद जमीन का कब्जा लेने और मंदिर बहाल करने के लिए 18 मुकदमे दाखिल किए हैं। यह विवाद मथुरा में मुगल बादशाह औरंगजेब के समय की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाया गया है।

हालांकि, मुस्लिम पक्ष (शाही ईदगाह की प्रबंधन समिति और उप्र सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड) ने इन मुकदमों का विभिन्न आधार पर विरोध किया है।

क्या है विवाद ?

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर और शाही ईदगाह मस्जिद का यह पूरा विवाद 13.37 एकड़ जमीन पर मालिकाना हक को लेकर है। इस जमीन के 11 एकड़ में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर है तो बाकी बचे 2.37 एकड़ में शाही ईदगाह मस्जिद बनी है। हिंदू पक्ष का दावा है कि पूरी जमीन श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर की है और पूरी जमीन उन्हें देने की मांग कर रहा है। वहीं मुस्लिम पक्ष इस दावे से इनकार कर रहा है।

वहीं, जानकार दावा करते हैं कि इस विवाद का इतिहास 350 साल पुराना है। साल 1670 में जब दिल्ली में मुगल शासक औरंगजेब का शासन था, उसी दौरान ठाकुर केशव देव मंदिर को तोड़कर उसके ऊपर शाही ईदगाह मस्जिद बनवाई गई थी। मस्जिद के निर्माण में मंदिर के ही अवशेषों का इस्तेमाल किया गया था। यही वजह है मस्जिद में सनातन धर्म के प्रतीक होने का दावा किया जा रहा है।

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