
नितिन साहनी, भोपाल। मध्य प्रदेश के 1000 से ज्यादा चयनित शिक्षकों को ये समझ नहीं आ रहा कि वे सरकारी नौकरी मिलने की खुशी जताएं या फिर सरकार की गलती की वजह से दुख जताएं। खुशी की वजह यह है कि इनकी पोस्टिंग के आदेश जारी कर दिए गए हैं लेकिन दुख की वजह यह है कि इन शिक्षकों को पसंदीदा जिले में पदस्थापना ही नहीं मिल पा रही है, जबकि सरकार के जनजातीय कार्य विभाग ने इन सभी शिक्षकों से पसंदीदा स्कूल और जिले की च्वाइस फिलिंग कराई थी। इन सभी शिक्षकों ने अपनी पसंद के स्कूल और जिलों की च्वाइस फिलिंग कर दी तो भोपाल में विभाग के मुख्यालय द्वारा जो पदस्थापना आदेश जारी किए गए, उनमें स्कूल का नाम तो च्वाइस फिलिंग के हिसाब से जारी किया गया लेकिन जिले का नाम बदल दिया गया।
अब चयनित शिक्षक परेशान हो रहे हैं क्योंकि जिस स्कूल में उन्हें ज्वाइन करना है उस जिले का नाम उनके पोस्टिंग ऑर्डर में नहीं है और जिस जिले का नाम उनके पोस्टिंग ऑर्डर में है उस जिले में वह स्कूल है ही नहीं। हालांकि विभाग ने इस गलती को स्वीकार तो किया है लेकिन यह निर्देश भी दे दिए कि जिस जिले का नाम पोस्टिंग ऑर्डर में है वही चयनित शिक्षक अपनी ज्वाइनिंग देंगे। ऐसे में अब विभाग की लापरवाही के चलते चयनित शिक्षकों को अपने पसंद के जिले से सैंकड़ों किलोमीटर दूर जाकर दूसरे जिले में नौकरी करनी होगी।

यह है पूरा मामला…
2018 में प्रदेश में शिक्षक संवर्ग के लगभग 30 हजार पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। 2019 में इन पदों के लिए परीक्षा ली गई और 2019 में परीक्षा का नतीजा आया और अप्रैल 2021 तक सभी सफल आवेदकों का डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन भी हो गया। पोस्टिंग न मिलने से नाराज इन चयनित शिक्षकों ने आंदोलन शुरू किया। सरकार ने 2023 में इन शिक्षकों की पदस्थापना की प्रक्रिया शुरू की। 30 हजार पदों में से लगभग 7 हजार पद जनजतीय कार्य विभाग के स्कूलों के लिए थे। जनजातीय कार्य विभाग ने इन चयनित शिक्षकों को पोस्टिंग देने से पहले रिक्त पदों के आधार पर तीन पसंदीदा स्कूल और स्कूल के डाइस कोड के साथ ही जिले की च्वाइस ऑनलाइन लॉक करने को कहा था। इसी पसंद के आधार पर इन शिक्षकों को नियुक्ति दी जानी थी। इस च्वाइस लॉक के बाद भोपाल से जो सूची जारी की गई उसमें लगभग 1000 से ज्यादा आवेदकों के स्कूल के नाम और जिलों के नाम अलग-अलग हैं।

ऐसे समझें इस गलती को..
खंडवा जिले की निवासी पूजा ठाकुर ने च्वाइस फिलिंग के जरिए तीन शालाओं का नाम च्वाइस लॉक में दर्ज किया। पूजा खंडवा जिले की ही निवासी है, लिहाजा उसने खंडवा जिले की ही तीनों पसंदीदा स्कूल और उनके डाइस कोड का नाम च्वाइस फिलिंग में भरा। पूजा को जारी किए गए आदेश के अनुसार उसकी पोस्टिंग प्राथमिक शाला बखार ब्लॉक तलवड़िया में की गई है, जो खंडवा जिले में है। लेकिन, आदेश में जिले का नाम खंडवा के बजाय अलीराजपुर लिखा है। ऐसे में अब पूजा को अलीराजपुर जिले में जाकर ज्वाइनिंग देनी होगी, जो खंडवा से लगभग 300 किमी है। पूजा के साथ अब उनके परिजन भी परेशान हैं, क्योंकि उसे परिवार से दूर अकेले रहकर अलीराजपुर में नौकरी करनी होगी। लगभग यही कहानी खंडवा, खरगौन, बड़वानी, धार के एक हजार से ज्यादा चयनित शिक्षकों की है। इसे लेकर चयनित शिक्षकों ने विभाग के आला अफसरों से शिकायत भी की लेकिन नतीजा शून्य रहा। इस तरह की त्रुटि को लेकर जिलों में तैनात जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्तों ने भी सूचना विभाग को भेजी थी।
इनका कहना है
इस तरह की शिकायतों के बाद विभाग ने दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। आवेदक के पोस्टिंग ऑर्डर में जिस जिले का नाम शामिल है, वहीं ज्वाइनिंग होगी। यदि संबंधित स्कूल का नाम जिले में नहीं है तो उसे ज्वाइनिंग ऑर्डर वाले जिले में ही अन्य स्कूल में पदस्थ किया जाएगा।
अनिल गुप्ता, सहायक संचालक, जनजातीय कार्य विभाग,भोपाल