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केंद्र IAS कैडर नियम 1954 में क्या संशोधन करना चाहता है, ममता बनर्जी को क्यों है आपत्ति?

केंद्र की मोदी सरकार जल्द ही IAS कैडर नियम 1954 में संशोधन करने जा रही है। इस संशोधन के प्रस्ताव के संबंध में हाल ही में राज्य सरकारों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए IAS अफसरों की सूची भेजने के निर्देश दिए हैं। जिसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

ममता बनर्जी ने जताई आपत्ति

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस प्रस्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिखा है। जानकारी के मुताबिक, केंद्र सरकार 31 जनवरी से शुरू होने वाले संसद के आगामी सत्र में यह संशोधन पेश कर सकती है। केंद्र ने इसके लिए 25 जनवरी से पहले राज्यों से जवाब मांगा है।

ममता बनर्जी ने PM मोदी को लिखा पत्र

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री को लिखे अपने पत्र में कहा कि इससे अधिकारियों में ‘भय का माहौल’ पैदा होगा एवं उनका कार्य-निष्पादन प्रभावित होगा। 8 दिनों में इस विषय पर दूसरी बार मोदी को लिखे पत्र में बनर्जी ने कहा कि संशोधन से संघीय तानाबाना एवं संविधान का मूलभूत ढांचा ‘नष्ट’ हो जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र अपने इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं करता है तो ‘बड़ा आंदोलन’ किया जाएगा।

ममता बनर्जी ने कहा…

मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं आपसे केंद्र सरकार के इस कदम पर सहृदय पुनर्विचार करने एवं इस प्रस्तावित संशोधन की दिशा में आग नहीं बढ़ने की अपील करती हूं। मैं आपसे अनुरोध करती हूं कि हमें इस मुद्दे पर इस हद तक नहीं धकेला जाए कि हम इस महान लोकतंत्र, जो भारत है एवं रहा है कि आत्मा की रक्षा की खातिर बड़े आंदोलन के लिए विवश हो जाएं। सीएम ने कहा कि ये भी कहा कि यदि प्रस्तावित बदलाव लागू किए गए तो इससे केंद्र एवं राज्य के बीच एक दूसरे की भावना के सम्मान के जज्बे को ‘अपूरणीय’ क्षति पहुंचेगी।

IAS कैडर नियम 1954 क्या है ?

IAS कैडर नियम 1954 के मुताबिक, अधिकारियों की भर्ती केंद्र करता है, लेकिन जब उन्हें उनके राज्य कैडर आवंटित किए जाते हैं, तो वे राज्य सरकार के अधीन आ जाते हैं। इस तरह संघीय ढांचा काम करता है। IAS कैडर नियमों के अनुसार एक अधिकारी को संबंधित राज्य सरकार और केंद्र सरकार की सहमति से ही केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के अधीन सेवा के लिए प्रतिनियुक्त किया जा सकता है।

इस नियम के मुताबिक किसी भी असहमति के स्थिति में केंद्र सरकार फैसला लेती है और राज्य सरकार द्वारा केंद्र सरकार के निर्णय को लागू किया जाता है। केंद्र को अधिक विवेकाधीन अधिकार देने वाले प्रतिनियुक्ति के मामले में यह नियम मई 1969 में जोड़ा गया था।

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