
इस्लामाबाद। विदेश मंत्री एस जयशंकर मंगलवार को SCO की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान के इस्लामाबाद पहुंच गए हैं। 9 साल पाकिस्तान जाने वाले पहले भारतीय नेता हैं। छोटी बच्चियों ने फूल देकर जयशंकर का स्वागत किया। इससे पहले भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिसंबर 2015 में पाकिस्तान का दौरा किया था। बता दें, पाकिस्तान ने अगस्त में प्रधानमंत्री मोदी को SCO का न्योता भेजा था, लेकिन दोनों देशों के बीच खराब रिश्तों के चलते विदेश मंत्री एस जयशंकर इस बैठक में शामिल हुए हैं।
दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा नहीं करेंगे जयशंकर
पाकिस्तान जाने से पहले ही जयशंकर ने साफ कर दिया था कि वो दोनों देशों के रिश्तों पर चर्चा नहीं करेंगे। उनका इकलौता मकसद SCO है। पाकिस्तान में SCO की बैठक में शामिल होने के लिए भारत के अलावा रूस और चीन समेत 10 देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचेंगे। सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए इस्लामाबाद में लॉकडाउन लगा दिया गया है। इसके साथ ही शहर में 3 दिन के लिए छुट्टी की घोषणा की गई है।
यात्रा का उद्देश्य क्या है
सितंबर में हुई विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत-पाकिस्तान रिश्तों के सुधरने की गुंजाइशों के सवाल पर रणधीर जायसवाल ने साफ किया था कि एस जयशंकर की यात्रा का उद्देश्य भारत की SCO चार्टर के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाना है। इसका कोई और मकसद नहीं है। पाकिस्तान ने 29 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मीटिंग के लिए न्योता भेजा था। इसकी जानकारी पाकिस्तान की विदेश विभाग की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने दी थी।
पाकिस्तानी दौरा करने वाली आखिरी मंत्री थीं सुषमा स्वराज
भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दिसंबर 2015 में पाकिस्तान का दौरा किया था। वह पाकिस्तान का दौरा करने वाली आखिरी मंत्री थीं। उन्होंने यह दौरा पीएम मोदी के साल 2015 में लाहौर सरप्राइज विजिट के बाद किया था। इसके बाद से अब तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री या मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा नहीं की है। 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था।
पिछले साल गोवा SCO बैठक में मिले थे दोनों देशों के विदेश मंत्री
पिछले साल 4 मई 2023 को गोवा में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में एस जयशंकर और पाकिस्तान के तत्कालिन विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो के बीच मुलाकात हुई थी। उस दौरान दोनों नेताओं ने एक दूसरे का अभिवादन स्वीकर किया था।
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