
90s में आई यूथ रोमांटिक मूवी इश्क विश्क से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली एक्ट्रेस शेनाज ट्रेजरी इन दिनों एक गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। एक्ट्रेस ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर इस बीमारी का खुलासा करते हुए बताया कि, वह प्रोसोपैग्नोसिया से ग्रसित हो गई हैं। इस बीमारी को फेस ब्लाइंडनेस भी कहते हैं। उन्होंने बताया कि इस बीमारी के कारण उन्हें लोगों के चेहरे पहचानने में समस्या होती है।
गंभीर बीमारी से जूझ रही एक्ट्रेस
शेनाज ने बताया कि उन्हें प्रोसोपेग्नोसिया डायग्नोस किया गया है, इस बीमारी की जानकारी उन्हें भी अभी ही मिली है। शेनाज ने कहा कि – ‘मैं हमेशा से शर्मिंदगी महसूस करती थी कि मैं लोगों के चेहरे पहचान नहीं पाती हूं, मुझे सिर्फ आवाजें पहचान में आती थी।’
एक दूसरी स्टोरी अपडेट में शेनाज ने लिखा कि- ‘हां ये मैं हूं, मुझे एक मिनट लग जाते हैं समझने में कि सामने कौन है। कभी-कभी ये कोई क्लोज फ्रेंड भी होते हैं, जिन्हें मैंने कुछ समय से देखा नहीं होता है।’
शेनाज ने फैंस को बताया इस बीमारी के लक्षण
शेनाज ने अपने अगले पोस्ट के जरिए यह भी बताया कि इस बीमारी के लक्षण क्या-क्या हैं? उन्होंने लिखा, ‘इसमें जो शख्स इस बीमारी से जूझ रहा होता है, वो अपने करीबी दोस्तों और फैमिली मेंबर्स के चेहरे भी नहीं पहचान पाता है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘हां ये मैं हूं। मुझे लोगों को पहचानने में समय लगता है। कई बार वो करीबी दोस्त भी होते हैं, जिसे मैंने कई दिनों से देखा नहीं होता है।’
लंबे वक्त से हैं बॉलीवुड से दूर
शेनाज का जन्म 29 जून 1981 को मुंबई में हुआ था। शहनाज के करियर की शुरुआत MTV से हुई थी। जहां वो मोस्ट पॉपुलर रेडियो जॉकी रह चुकी हैं। शहनाज ने यूं तो फिल्मी करियर की शुरुआत तुलेगू फिल्म एढुरुलेनी मनिषि से की थी, लेकिन पहचान बॉलीवुड फिल्म इश्क विश्क से मिली। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिव एक्टर कैटेगरी में नॉमिनेट भी किया गया था।
इसके साथ ही शेनाज ने फिल्म ‘डेल्ही-बेली’, ‘मैं और मिस्टर राइट’, ‘हम-तुम’, ‘उम्र’, ‘आगे से राइट’, ‘रेडियो’, ‘वन लाइफ टू लिव’ सहित कई फिल्मों में काम भी किया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली शेनाज इन दिनों ट्रैवल आर्टिकल्स लिखती हैं। वह अब ट्रैवल व्लॉगर के तौर पर मशहूर हैं।
क्या है प्रोसोपेग्नोसिया?
ये बीमारी दिमाग से जुड़ी होती है। इस बीमारी के शिकार लोग आंखें, नाक, मुंह को अलग-अलग देख सकते हैं लेकिन किसी के चेहरे को सही रूप से नहीं देख पाते। इसका सबसे मुश्किल पहलू यह है कि लोगों को तुरंत पता नहीं चलता कि उनके साथ कोई गड़बड़ हो गई है।
प्रोसोपेग्नोसिया दो तरह की होती है-
1. विकासशील- जिसमें लोग चेहरा पहचानने की योग्यताओं को विकसित करने में असफल रहते हैं।
2. उपार्जित- यह दिमाग़ में किसी तरह की चोट लगने के बाद होता है और यह बहुत दुर्लभ है।
इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज अब तक नहीं निकल पाया है।