
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा चुनाव से पहले पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (Pok) का जिक्र किया। नई दिल्ली में आयोजित साक्षात्कार में शामिल हुए अमित शाह ने पीओके को भारत का हिस्सा बताया। साथ ही कहा कि, वहां रहने वाले सभी लोग चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम सभी भारतीय हैं। इसके अलावा उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि, नागरिकता संशोधन अधिनियम को लेकर विपक्षी दल मुस्लिम समुदाय को गुमराह कर रहा है।
PoK के सभी लोग भारतीय : अमित शाह
गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार यानी 15 मार्च एक साक्षात्कार में शामिल हुए। उसमें बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) भारत का हिस्सा है। वहां रहने वाले सभी लोग चाहे वह हिंदू हो या मुस्लिम सभी भारतीय हैं।”
मुस्लिम का नहीं होता उत्पीड़न : अमित शाह
शाह ने नागरिकता संशोधन कानून पर भी बात की। उन्होंने इस कानून के दायरे से मुस्लिमों को बाहर रखने पर कहा- CAA के तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी। ये तीनों इस्लामिक देश हैं। वहां मुस्लिमों का उत्पीड़न नहीं होता है।
हमने पूरा किया नेहरू का वादा : गृह मंत्री
गृह मंत्री ने आगे बात करते हुए कहा कि, भारत-पाक के विभाजन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सहित कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा था कि पाकिस्तान से आए अल्पसंख्यकों का भारत में स्वागत किया जाएगा। तब पाकिस्तान में हिंदू आबादी 23 प्रतिशत थी। अब यह घटकर दो प्रतिशत हो गई है। बांग्लादेश में हिंदुओं की संख्या 22 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत हो गई है। अफगानिस्तान में पहले सिखों की संख्या करीब दो लाख थी, अब वहां मात्र 378 सिख ही बचे हैं। हमने कांग्रेस का वादा पूरा किया।
विपक्ष की बात न सुनें मुस्लिम भाइयों-बहनों
अमित शाह ने CAA का विरोध कर रहे लोगों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा- जो लोग यह कहकर CAA का विरोध कर रहे हैं कि ये कानून धर्म पर आधारित है, वही लोग मुस्लिम पर्सनल लॉ जैसे कानूनों का समर्थन करते हैं। CAA में नागरिकता नहीं छिनेगी। मैं मुस्लिम भाइयों-बहनों से कहूंगा कि वे विपक्ष की बात न सुने।
एक राष्ट्र, एक चुनाव का बताया कारण
एक राष्ट्र, एक चुनाव पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा- इसके लागू होने की तारीख संसद द्वारा तय की जाएगी। इसका उद्देश्य चुनावों पर हो रहे खर्च पर लगाम लगाना है। हमें यह ध्यान रखना है कि बार-बार चुनावों के कारण विकास की गति प्रभावित न हो।