
दुनिया में लोग विकास और आधुनिकता के चलते अपनी परंपराओं और रीति-रिवाजों को भूल चुके हैं। वहीं अभी भी दुनिया में कई ऐसी जनजातियां हैं, जिनकी मान्यताएं दूसरों को हैरान कर देती हैं। आज हम आपको अफ्रीका महाद्वीप में रहने वाली एक ऐसी ही एक जनजाति के बारे में बताएंगे। जहां पर आदिवासी महिलाएं अपने जीवन में सिर्फ एक बार ही नहाती हैं।
जीवन में सिर्फ एक बार नहाती हैं महिलाएं
ये हैरान कर देने वाली बात है कि कैसे कोई जीवन में सिर्फ एक बार नहाकर रह सकता है। लेकिन, हिंबा जनजाति की महिलाएं सिर्फ अपनी शादी के दिन ही नहाती है। इसके अलावा वो कपड़े तक धोने के लिए पानी का इस्तेमाल नहीं करती हैं। इस जनजाति की महिलाएं खुद को साफ रखने के लिए खास जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर उसकी भाप से खुद को साफ करती हैं। इससे शरीर से बदबू नहीं आती है। जबकि, चमड़ी को धूप से बचाने के लिए ये महिलाएं जानवरों की चर्बी और लोहे की तरह एक खनिज तत्व, हेमाटाइट से बनाई गई खास तरह को लोशन को अपने शरीर पर लगाती हैं। इस तत्व से शरीर लाल हो जाता है जिससे वो खुद को मर्दों से अलग कर पाती हैं।
बच्चे के जन्म की रोचक परंपरा
जैसे की दुनिया में कई विचित्र जनजाति पाई जाती है। वहीं अफ्रीका के नामीबिया में रहने वाली हिंबा जनजाति बहुत ही अनोखी जनजाति है। वहीं इस जनजाति में बच्चे के जन्म को लेकर एक काफी रोचक परंपरा है। इस जनजाति में बच्चे के जन्म की तिथि तब नहीं मानी जाती है जब उसका दुनिया में जन्म होता है, बल्कि तब से मानी जाती है जब महिला इस बात को सोचती है कि वो बच्चे को जन्म देगी।
प्रेग्नेंसी के पहले ही बच्चों को देते हैं खास गीत
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला एक पेड़ के नीचे बैठकर बच्चे से जुड़े गीत को सुनने की कोशिश करती है। साथ ही जब उसे गीत मिल जाता है तब वह उसी गीत को अपने पार्टनर को भी सुनाती है। इसके बाद दोनों संबंध बनाने के दौरान इस गीत को गाते हैं। सिर्फ इतना ही नहीं जब कोई महिला गर्भवती हो जाती है, तब वह महिला जनजाति की दूसरी महिलाओं को भी गीत सिखाती है। इसके बाद फिर प्रेग्नेंसी के दौरान सभी महिलाएं उसे घेरकर गीत सुनाती हैं। बच्चे के पैदा होने से लेकर उसके बड़े होने तक गांव के हर व्यक्ति को बच्चे का गीत याद हो जाता है। इस गीत को इंसान के अंतिम सांस तक उसे सुनाया जाता है।