
भोपाल/शिवपुरी। स्वर्गीय माधवराव सिंधिया की जंयती पर टूरिज्म के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिल रही है। कूनो नेशनल पार्क के बाद अब शिवपुरी जिले के माधव नेशनल पार्क में बाघों की दहाड़ सुनाई देगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार (10 मार्च) को केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और राज्य के वन मंत्री विजय शाह के साथ प्रदेश के शिवपुरी जिले में बाघ विहीन हो चुके माधव नेशनल पार्क (एमएनपी) में बाघों को फिर से बसाने की योजना के तहत राज्य के अन्य बाघ अभयारण्यों से लाए गए एक बाघ और दो बाघिनों को छोड़ेंगे।
पन्ना-बांधवगढ़ से बाघिनों और सतपुड़ा से बाघ को लाया गया
जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी जिले की सीमा श्योपुर जिले से लगती है, जहां कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) स्थित है। देश में चीतों को फिर से बसाने की योजना के तहत केएनपी में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों को लाया गया है। एमएनपी के निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया, भोपाल स्थित मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) से पिछले 7 अक्टूबर में पकड़े गए बाघ को एमएनपी लाया जाएगा। जबकि, पन्ना और बांधवगढ़ बाघ अभयारण्यों से दो बाघिनों को वहां स्थानांतरित किया जाएगा। मैनिट से पकड़े गए दो साल के बाघ को सतपुड़ा बाघ अभयारण्य में छोड़ दिया गया था।
तीनों को अलग-अलग बाड़ों में रखा जाएगा
सीसीएफ शर्मा ने बताया कि बाघों की सुरक्षा के लिए माधव नेशनल पार्क में पुख्ता इंतजाम हैं। तीनों बाघों को सैटेलाइट कॉलर बीएचपी सुविधा के साथ लाया जा रहा है। नेशनल पार्क में वायरलेस सिस्टम लगाया गया है। तीनों बाघों के लिए अलग-अलग बाड़े बनाए गए हैं। तीनों बाघों को 10 से 15 दिनों तक निगरानी में रखा जाएगा। शर्मा ने बताया कि इन बाघ-बाघिनों को कुछ समय के लिए अलग-अलग बाड़ों में रखा जाएगा। इसके बाद स्थिति सामान्य रही, तो उन्हें एमएनपी के जंगलों में छोड़ दिया जाएगा।
एमएनपी में नहीं है कोई बाघ
शिवपुरी जिला मुख्यालय से 12 किमी दूर माधव नेशनल पार्क सटा है। पार्क विंध्याचल की पहाड़ियों पर बसा है। एमएनपी 375 वर्ग किमी के दायरे में फैला हुआ है। शर्मा ने कहा यह तीसरी बार है, जब मध्य प्रदेश वन विभाग एक वन्यजीव अभयारण्य में बाघ को फिर से बसाने जा रहा है। उन्होंने बताया कि एमएनपी में वर्तमान में कोई बाघ नहीं है। इससे पहले, पन्ना बाघ अभयारण्य और सागर के नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य में बाघों को सफलतापूर्वक बसाया जा चुका है।
बाघों में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे
वन अधिकारियों के मुताबिक, एमएनपी में बाघों के लिए अच्छा शिकार उपलब्ध है। इसलिए केंद्र सरकार ने यहां बाघों को फिर से बसाने की योजना को मंजूरी दी है। अधिकारियों ने बताया कि एमएनपी में छोड़े जाने वाले बाघों में रेडियो कॉलर लगाए जाएंगे और जंगल में उन पर नजर रखने के लिए तीन दल गठित किए गए हैं।
सालों बाद सुनाई देगी बाघों की दहाड़
शिवपुरी के माधव नेशनल पार्क में 27 साल बाद एक बार फिर से बाघों की दहाड़ सुनाई देगी। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक शुभ रंजन सेन ने कहा कि 1970 में माधव नेशनल पार्क में बाघों की संख्या काफी अधिक थी। लेकिन, अंतिम बार 1996 में यहां बाघ देखा गया था। अब माधव नेशनल पार्क एक बार फिर से बाघों से आबाद होने जा रहा है। टाइगर प्रोजेक्ट के तहत यहां कुल 5 बाघों को बसाए जाने की योजना है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, 2010 से 2012 के बीच कुछ समय के लिए राजस्थान के बाघ एमएनपी के आसपास घूमते मिले थे। वन्यजीव विशेषज्ञों ने कहा कि एमएनपी में बाघ मुख्य रूप से शिकार के कारण खत्म हो गए।