
प्रयागराज। महाकुंभ के ऐतिहासिक अवसर पर आध्यात्मिक चेतना और वैदिक संस्कृति को जीवंत करते हुए, दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के दिव्य ज्योति वेद मंदिर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के 566 ब्रह्मज्ञानी वेदपाठियों ने 33 दिनों तक नॉन-स्टॉप रुद्री संहिता का पाठ कर एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया।
इस अद्वितीय आध्यात्मिक साधना का आरंभ 14 जनवरी को हुआ और 16 फरवरी की सुबह 4 बजे सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
26 लाख मंत्रों का जाप, 794 घंटे तक हुआ पाठन
इस विश्व रिकॉर्ड में शुक्ल यजुर्वेद से रुद्राष्टाध्यायी संहिता (रुद्री पाठ) का 11,151 बार पाठन किया गया, जिसमें कुल 26,42,409 वैदिक मंत्रों का जाप हुआ। इस पाठ का संपूर्ण आयोजन 794 घंटों तक अविराम रूप से चलता रहा। इस ऐतिहासिक अनुष्ठान में संस्थान के वेदपाठी भारत सहित विश्वभर से प्रयागराज स्थित सेक्टर 9 के शिविर में आए थे। सभी वेदपाठी दिव्य गुरु आशुतोष महाराज के शिष्य-शिष्याएं थे, जिन्होंने अपने निस्वार्थ समर्पण और वैदिक परंपरा के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ इस महान कार्य को संपन्न किया।
एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड ने दी आधिकारिक मान्यता
महाकुंभ में हुए इस अद्वितीय आयोजन को एशिया और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के निर्णायक प्रमिल द्विवेदी ने आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया। उन्होंने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के अध्यक्ष स्वामी आदित्यानंद जी और सचिव स्वामी नरेंद्रानंद जी को यह सम्मान प्रदान किया।
उन्होंने कहा, “संस्थान द्वारा किया गया यह अनुष्ठान न केवल एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह भारतीय वैदिक संस्कृति की महानता को स्थापित करने का एक प्रयास भी है। यह आयोजन विश्वभर में वैदिक परंपराओं के प्रचार-प्रसार को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।”
संस्थान के लिए गर्व का क्षण
दिव्य ज्योति वेद मंदिर की इंचार्ज साध्वी दीपा भारती जी ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए हुए कहा, “संस्थान को इस बात पर गर्व है कि वह ऐसी असाधारण पहल करने वाला पहला आध्यात्मिक संगठन है। लेकिन यह उपलब्धि सिर्फ रिकॉर्ड बनाने तक सीमित नहीं है। हमारा मुख्य उद्देश्य वैदिक मंत्रोच्चार के माध्यम से प्रत्येक हृदय में शांति, प्रेम और एकता की भावना को जाग्रत करना है।”
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