
नेपाल की राजधानी काठमांडू में रविवार सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई। भूकंप इतना तेज था कि बिहार के कई जिलों में इसका असर देखने को मिला है। लोगों का कहना है कि उन्हें भी झटके महसूस हुए। फिलहाल भूकंप की वजह से किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
कहां था भूकंप का केंद्र?
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने बताया, सुबह करीब 7:58 मिनट पर झटके महसूस किए गए। नेपाल से सटे मधुबनी, समस्तीपुर, अररिया, कटिहार, सीतामढ़ी में सुबह 7.58 बजे धरती हिली। राजधानी से 147 किमी पूर्व-दक्षिण पूर्व में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेपाल के नेशनल अर्थक्वेक मॉनिटरिंग एंड रिसर्च सेंटर (NEMRC) के मुताबिक, खोटांग जिले के मारतिम बिरता नामक जगह पर भूकंप आया। भूकंप का एपिसेंटर पूर्वी नेपाल के 10 किलोमीटर के दायरे में मापा गया।
पिछले महीने भी आया था भूकंप
- इससे पहले पिछले महीने ही नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 मापी गई थी। भूकंप का केंद्र काठमांडू से 161 किमी दूर था।
- 25 अप्रैल 2015 को नेपाल की राजधानी काठमांडू और पोखारा शहर के बीच 7.8 तीव्रता का भूकंप आया था। इस भूकंप की वजह से 8,964 लोग मारे गए थे और करीब 22 हजार लोग घायल हो गए थे।
- नेपाल में आए इस विनाशकारी भूकंप को गोरखा भूकंप के नाम से भी जाना जाता है। इसने उत्तर भारत के कई शहरों समेत पाकिस्तान और बाग्लादेश के कुछ इलाकों को हिला दिया था।
- भूकंप की वजह से माउंट एवरेस्ट पर बर्फीला तूफान आ गया था, जिसमें 22 लोगों की मौत हो गई थी।
- 1934 में नेपाल में अब तक का सबसे भयंकर भूकंप आया था। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 8.0 मापी गई थी। इसने राजधानी काठमांडू समेत नेपाल के भक्तपुर और पाटन को तबाह कर दिया था।
आखिर क्यों आते हैं भूकंप?
भूकंप आने के पीछे की वजह पृथ्वी के भीतर मौजूद प्लेटों का आपस में टकराना है। हमारी पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूमती हैं। जब ये आपस में टकराती हैं, तब फॉल्ट लाइन जोन बन जाता है। जिसकी वजह से सतह के कोने मुड़ जाते हैं और वहां दबाव बनने लगता है। ऐसी स्थिति में प्लेट के टूटने के बाद ऊर्जा पैदा होती है, जो बाहर निकलने के लिए रास्ता ढूंढती है। जिसकी वजह से धरती हिलने लगती है।
कैसे मापते हैं भूकंप की तीव्रता
रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता मापी जाती है। भूकंप को 1 से 9 तक के आधार पर मापा जाता है। भूकंप को इसके केंद्र (एपीसेंटर) से मापा जाता है। भूकंप को लेकर चार अलग-अलग जोन में बांटा गया है। मैक्रो सेस्मिक जोनिंग मैपिंग के अनुसार इसमें जोन-5 से जोन-2 तक शामिल है। जोन 5 को सबसे ज्यादा संवेदनशील माना गया है और इसी तरह जोन दो सबसे कम संवेदनशील माना जाता है।
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किस तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक है
• 0 से 1.9 तीव्रता का भूकंप काफी कमजोर होता है। सीज्मोग्राफ से ही इसका पता चलता है।
• वहीं 2 से 2.9 तीव्रता का भूकंप रिक्टर स्केल पर हल्का कंपन करता है।
• 3 से 3.9 तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे कोई ट्रक आपके नजदीक से गुजर गया हो।
• 4 से 4.9 तीव्रता का भूकंप आने पर खिड़कियां टूट सकती हैं। साथ ही दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
• 5 से 5.9 तीव्रता का भूकंप आने पर घर का फर्नीचर हिल सकता है।
• 6 से 6.9 तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतों की नींव दरक सकती है।
• 7 से 7.9 तीव्रता का भूकंप खतरनाक होता है। इससे बिल्डिंग गिर जाती हैं और जमीन में फाइप फट जाती है।
• 8 से 8.9 तीव्रता का भूकंप काफी खतरनाक होता है। जापान, चीन समेत कई देशों में 8.8 से 8.9 तीव्रता वाले भूकंप ने खूब तबाही मचाई थी।
• 9 और उससे ज्यादा तीव्रता का भूकंप आने पर पूरी तबाही होती है। इमारतें गिर जाती है। पेड़ पौधे, समुद्रों के नजदीक सुनामी आ जाती है।