
इंदौर। पुलिस कमिश्नर जनसुनवाई में मंगलवार को एक आरक्षक की पत्नी अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज करने पहुंची। पति के अवैध संबंध के चलते कई वर्षों से पत्नी अलग रह रही है। पति द्वारा कई बार महिला को परेशान किए जाने के बाद भी पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कोई मदद नहीं की जा रही है। वहीं महिला ने कई गंभीर आरोप अपने पति पर लगाए। दूसरी और महिला अपराध शाखा की एसीपी द्वारा जल्द मामले के निराकरण की बात भी कही गई।
2009 में दर्ज करवाया था महिला ने पहला केस
जनसुनवाई में पहुंची मंजू नामक महिला द्वारा मीडिया से चर्चा करते हुए बताया गया कि जब वह 14 वर्ष की थी तो उसका विवाह विजय चौहान निवासी अजमेरा जिला धार से हुआ था। वर्ष 2003 में जब विजय चौहान और मंजू की शादी हुई थी वक्त विजय पढ़ाई कर रहा था। वह आरक्षक नहीं बना था, लेकिन शादी के कुछ वर्षों बाद 2009 में विजय चौहान द्वारा अपनी पत्नी मंजू के साथ मारपीट की गई। जिसकी शिकायत उसने अमझेरा जिला धार थाने में की गई थी। उसे समय विजय चौहान की नौकरी लगने ही वाली थी। इस कारण से ससुराल वाले के दबाव में आकर वर्ष 2009 में मंजू द्वारा मारपीट का केस वापस ले लिया गया। विजय चौहान जिसके बाद पुलिस आरक्षक में भर्ती हो गया।
दहेज प्रताड़ना और भरण पोषण का चल रहा केस
विजय की पुलिस में भर्ती के बाद उसने एक अन्य महिला आरक्षक से संबंध बनाए, जिसकी जानकारी मंजू को लग गई। मंजू कई बार महिला आरक्षक के साथ विजय चौहान को रंगे हाथों पकड़ चुकी है और इसकी शिकायत उसने परिवार के साथ पुलिस थाने में भी की थी। इस पर कई बार जनसुनवाई में आने के बाद भी जब मंजू को इंसाफ नहीं मिला तो उसने कोर्ट के दरवाजा खटखटा, जिसमें दहेज प्रताड़ना और भरण पोषण का केस चल रहा है।
पुलिस अधिकारी नहीं कर रहे मदद
मंजू का कहना था कि वर्ष 2006 में उसे पहले बच्चा हुआ और उसके कुछ समय बाद उसे दूसरा भी बालक हुआ। वर्तमान समय में एक बालक 12वीं क्लास में और दूसरा बालक 7वीं क्लास में पढ़ रहा है। दोनों बालकों के साथ खुद के भरण पोषण के लिए कई बार विजय चौहान के खिलाफ मंजू पुलिस कंट्रोल रूम में आवेदन दे चुकी है, लेकिन पुलिस के अधिकारी उसकी किसी प्रकार से कोई मदद नहीं कर रहे हैं।
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मंजू को इंसाफ दिलाया जाएगा : एसीपी
वहीं महिला अपराध शाखा की एसीपी अपूर्व द्वारा मंजू को बताया गया कि विजय चौहान पर जो भरण पोषण का उन्होंने कोर्ट में केस लगा रखा है। वह विचाराधीन है। वहीं विजय चौहान से चर्चा कर इस पूरे मामले पर जल्द निर्णय लेकर मंजू को इंसाफ भी दिलाया जाएगा। जिससे कि वह उसके दोनों बच्चों का भरण पोषण ठीक ढंग से कर सके।
(इनपुट – हेमंत नागले)
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