
नरेश भगोरिया-भोपाल। विख्यात शिक्षाविद, वकील डॉ. हरी सिंह गौर की कर्मभूमि, बुंदेलखंड की माटी में रचा बसा शहर सागर संसदीय क्षेत्र इस बार अपना 18वां सांसद चुनने जा रहा है। कभी बीड़ी उद्योग भी इस अंचल की पहचान हुआ करता था, लेकिन वर्तमान में सागर सेंट्रल यूनिवर्सिटी इस शहर और क्षेत्र की बड़ी पहचान है। प्रदेश में इस शहर से एक साथ तीन मंत्री भी रहे। लेकिन फिर भी अंचल में विकास की रफ्तार अपेक्षाकृत कम रही। 28 साल से यहां भाजपा के सांसद रहे हैं।
चार बार वीरेंद्र खटीक ने यहां से जीत हासिल कर अपनी पहचान बनाई, इसके बाद हर चुनाव में नया चेहरा सांसद के रूप में मिला। 1996 से 2004 डॉ. वीरेंद्र खटीक यहां से सांसद चुने गए। जब यह सीट अनारक्षित घोषित हुई तो 2009 में भूपेंद्र सिंह, 2014 में लक्ष्मीनारायण यादव और 2019 में राजबहादुर सिंह सांसद बने। 2024 में भाजपा ने नए चेहरे के तौर पर लता वानखेड़े प्रत्याशी बनाया है।
2024 में इनके बीच मुकाबला
- लता वानखेड़े: भाजपा ने महिला मोर्चा पदाधिकारी रहीं लता वानखेड़े को प्रत्याशी बनाया है।
- चंद्रभूषण सिंह: कांग्रेस ने चंद्रभूषण सिंह गुड्डू राजा बुंदेला को इस सीट से प्रत्याशी बनाया है।
आठ विधानसभा सीटों में से सिर्फ एक कांग्रेस के पास
2023 के विधानसभा चुनाव में सागर की आठ सीटों में सिर्फ एक पर कांग्रेस जीत सकी। बीना विधानसभा क्षेत्र से एडवोकेट निर्मला सप्रे विधायक हैं। खुरई, सुरखी, सागर, नरयावली, कुरवाई, सिरोंज और शमशाबाद से भाजपा के विधायक हैं।
25 फीसदी एससी वोटर, दूसरे नंबर पर ब्राह्मण
सागर लोकसभा क्षेत्र की तीन विधानसभाएं अनुसूचित जाति वर्ग के लिए आरक्षित हैं। बीना, नरयावली और कुरवाई। इस तरह संसदीय क्षेत्र में करीब 22 से 25 प्रतिशत एससी वोटर हैं। इसके बाद ब्राह्मण और राजपूत वोट हैं। ये करीब 10 से 12 फीसदी हैं। दांगी समाज की संख्या में खासी है। यह अन्य पिछड़ा वर्ग में आते हैं, जो लगभग 5 प्रतिशत हैं। इसके अलावा अनुसूचित जनजाति वर्ग के 5 से 6 फीसदी वोट इस लोकसभा क्षेत्र में हैं। मुस्लिम वोटर करीब 7 फीसदी हैं। सागर और आसपास करीब 50 हजार जैन समाज के लोग हैं।
इन क्षेत्रों में चाहिए विकास
- सागर में बड़े उद्योग की जरूरत।
- सागर के बीड़ी उद्योग को नए सिरे से विकसित करने की जरूरत।
- सागर को मुंबई-दिल्ली जैसे शहरों के लिए ट्रेन सुविधाएं बढ़ने से यहां के लोगों का आवागमन सुविधाजनक होगा।
कार्यकर्ता संगठन से साथ
कांग्रेस के कुछ नेता भाजपा में गए लेकिन कार्यकर्ता संगठन के साथ खड़ा है। हमारे प्रत्याशी गुडडू राजा बुंदेला के पिता सुजान सिंह की कर्मभूमि सागर रही है। कोई बुंदेला बुंदेलखंड की धरती पर कैसे बाहरी हो सकता है। वास्तविकता तो यह है कि भाजपा की प्रत्याशी खुद मकरोनिया के बाहर नहीं निकलती थीं। हाईप्रोफाइल नेता को स्थानीय भाजपाई स्वीकार नहीं कर रहे। भाजपा हर बार अपना लोकसभा प्रत्याशी इसलिए बदलती है क्योंकि सांसद कोई काम नहीं करते थे। -संदीप सबलोक, प्रवक्ता कांग्रेस
पीएम पर जनता को भरोसा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी पर जनता को भरोसा है। बीना रिफाइनरी का पेट्रोकेमिकल हब बनाने की बात हो या बीना और सागर के स्टेशनों को 125 करोड़ से डेवलप करने का काम। चाहे शताब्दी एक्सप्रेस के स्टॉपेज की बात हो या जनहित के बड़े फैसले। भाजपा काम करने वाले कार्यकर्ताओं को मौका देती है कांग्रेस की तरह नहीं कि परिवारवाद चलाएं। हमारे पास कार्यकर्ताओं की भी कमी नहीं है। -गौरव सिरोठिया,भाजपा जिलाध्यक्ष