भोपाल हैकाथॉन में चांदौड़ा की यशस्वी बुंदेला ने बढ़ाया मान, 270 टीमों के बीच हासिल किया तीसरा स्थान
बेगमगंज। रायसेन जिले की बेगमगंज तहसील के छोटे से गांव चांदौड़ा की बेटी यशस्वी बुंदेला ने भोपाल में आयोजित MP Online हैकाथॉन में शानदार उपलब्धि हासिल की है। यशस्वी ने अपने परिवार के दो बच्चों, यशवर्धन सिंह चौहान और संयोगिता सिंह चौहान के साथ मिलकर प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया। नॉन-टेक्निकल श्रेणी में उनकी टीम ने ‘शिक्षा सेतु’ नाम से एक परियोजना प्रस्तुत की, जिसे 270 टीमों के बीच शीर्ष 15 फाइनलिस्ट में जगह मिली। टीम को सेकंड रनर-अप घोषित किया गया।
‘शिक्षा सेतु’ के जरिए ग्रामीण विद्यार्थियों को मिलेंगी जानकारियां
यशस्वी बुंदेला, पिता शिव प्रताप सिंह बुंदेला, ने यशवर्धन सिंह चौहान और संयोगिता सिंह चौहान के साथ मिलकर इस परियोजना पर काम किया। यशवर्धन और संयोगिता, दोनों ग्राम टोड़ा, जिला शिवपुरी के निवासी हैं और उनके पिता का नाम चंद्र प्रताप सिंह चौहान है। टीम की परियोजना ‘शिक्षा सेतु’ का उद्देश्य ग्रामीण विद्यार्थियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छात्रवृत्ति, नौकरी, इंटर्नशिप और विभिन्न प्रतियोगिताओं से जुड़ी जानकारियां उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को अलग-अलग वेबसाइटों पर जानकारी तलाशने की जरूरत कम होगी और उन्हें अपनी पढ़ाई तथा करियर से जुड़े अवसरों तक पहुंचने में मदद मिल सकेगी।
बिना विशेष तैयारी के प्रतियोगिता में उतरी टीम
इस उपलब्धि की खास बात यह है कि टीम प्रतियोगिता में बिना किसी विशेष तैयारी के शामिल हुई थी। इसके बावजूद सदस्यों ने अपने विचार, परियोजना और प्रस्तुति के दम पर 270 टीमों के बीच अपनी जगह बनाई। शीर्ष 15 फाइनलिस्ट में शामिल होने के बाद तीसरा स्थान हासिल करना टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। MP Online हैकाथॉन में मिली इस सफलता ने यशस्वी के गांव चांदौड़ा और बेगमगंज क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। छोटे गांव से निकलकर बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने वाली यशस्वी की उपलब्धि क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में मिला सम्मान
यह कार्यक्रम मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अदिति गर्ग की मौजूदगी में आयोजित हुआ। प्रतियोगिता में यशस्वी और उनकी टीम की सफलता ने ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए उपयोगी डिजिटल समाधान तैयार करने की दिशा में उनके प्रयासों को पहचान दिलाई।
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ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा बनी उपलब्धि
यशस्वी बुंदेला और उनके साथियों की यह सफलता बताती है कि प्रतिभा और नए विचारों के लिए बड़े शहरों में रहना जरूरी नहीं है। गांवों में रहने वाले युवा भी अपने विचारों और मेहनत के दम पर प्रदेश स्तर के मंचों पर पहचान बना सकते हैं।






















