West Bengal Biryani Poster: ‘बिरयानी खाओ, लेकिन हिंदू दुकान से!’ दुर्गा पूजा के बीच सिलीगुड़ी में पोस्टर वायरल, TMC-CPI(M) ने उठाए सवाल

पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के बीच बिरयानी की दुकानों को लेकर पोस्टर विवाद खड़ा हो गया है। सिलीगुड़ी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े संगठन हिंदू जागरण मंच के लगाए पोस्टरों में लोगों से हिंदू दुकानों से ही बिरयानी खरीदने की अपील की गई है। पोस्टर में पूजा का सामान भी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की बात कही गई है। मामला सामने आने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) और CPI(M) के नेताओं ने इसका विरोध किया है। विपक्षी नेताओं ने प्रशासन से पोस्टर हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।
सिलीगुड़ी में छिड़ा बिरयानी पोस्टर विवाद
पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में हिंदू जागरण मंच की ओर से लगाए गए पोस्टरों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इन पोस्टरों में लोगों से अपील की गई है कि वे बिरयानी जरूर खाएं, लेकिन इसे हिंदू दुकानों से ही खरीदें। पोस्टर में लिखा है, 'बिरयानी खाने से आपको कोई नहीं रोक रहा है। बिरयानी जरूर खाएं, लेकिन हिंदू दुकानों से।' दुर्गा पूजा के दौरान लगाए गए इन पोस्टरों में पूजा का सामान भी हिंदू दुकानदारों से खरीदने की अपील की गई है। सोशल मीडिया पर पोस्टरों की चर्चा होने के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि क्या खाने-पीने की चीजों और खरीदारी को धर्म के आधार पर बांटने की अपील की जानी चाहिए।
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TMC विधायक कुणाल घोष ने क्या कहा?
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता और बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष ने सिलीगुड़ी में लगाए गए पोस्टरों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि स्वाद को धार्मिक सीमाओं में नहीं बांधा जा सकता। कुणाल घोष के मुताबिक, किसी हिंदू दुकानदार की बिरयानी स्वादिष्ट हो सकती है, तो किसी मुस्लिम दुकानदार की बिरयानी भी उतनी ही अच्छी हो सकती है। खाने की पहचान उसके स्वाद से होनी चाहिए, न कि दुकानदार के धर्म से। उन्होंने यह भी कहा कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग तरह की टैगलाइन का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन धार्मिक मामलों में इस तरह की अपील से बचना चाहिए।
CPI(M) नेता अशोक भट्टाचार्य ने की कार्रवाई की मांग
CPI(M) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री अशोक भट्टाचार्य ने भी पोस्टरों का विरोध किया है। उन्होंने प्रशासन से पोस्टर हटाने और इसके पीछे शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। अशोक भट्टाचार्य ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश में लोगों को धर्म के आधार पर बांटने वाली ऐसी अपीलों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार प्राप्त हैं। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की आजीविका का आधार उसका धर्म नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से इस मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। हालांकि, पोस्टरों को लेकर पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी कार्रवाई की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
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दुर्गा पूजा के बीच पोस्टर विवाद क्यों अहम?
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा एक बड़ा सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। इस दौरान बाजारों, मिठाई की दुकानों, कपड़ों और खाने-पीने के कारोबार में काफी गतिविधियां रहती हैं। ऐसे समय में दुकानदारों को धर्म के आधार पर चुनने की अपील विवाद को और चर्चा में ले आई है। इस मामले में तीन प्रमुख सवाल सामने आ रहे हैं-
- धर्म और कारोबार: क्या ग्राहकों को दुकानदार के धर्म के आधार पर खरीदारी करने की अपील की जानी चाहिए?
- राजनीतिक प्रतिक्रिया: TMC और CPI(M) के नेताओं ने पोस्टरों पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
- सामाजिक सौहार्द: त्योहारों के दौरान अलग-अलग समुदायों के लोगों के बीच आपसी विश्वास और मेलजोल बनाए रखना कितना जरूरी है?
क्या पोस्टर हटेंगे?
सिलीगुड़ी में हिंदू जागरण मंच के पोस्टरों को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। TMC नेता कुणाल घोष ने खाने के स्वाद को धर्म से जोड़ने पर सवाल उठाए हैं, जबकि CPI(M) नेता अशोक भट्टाचार्य ने पोस्टर हटाने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब इस मामले में प्रशासन की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई पर नजर रहेगी।



















