
मुंबई के उपनगर वसई में एक अजीबोगरीब घटना सामने आई, जिसने चमत्कार और अंधविश्वास की ओर लोगों की गहरी आस्था को उजागर किया। वसई के एक चर्च में यीशु मसीह की मूर्ति के पैरों से पानी टपकते देख लोगों ने इसे आस्था का प्रतीक माना और चमत्कार समझकर पवित्र जल के रूप में इकट्ठा कर पीने लगे। यह दृश्य देखते ही देखते चर्च में भीड़ उमड़ने लगी और लोग इसे एक दिव्य संकेत मानते हुए श्रद्धा से पानी को अपने साथ ले जाने लगे। यह घटना साल 2012 में हुई थी।
मूर्ति से निकला पवित्र जल था शौचालय का पानी
इस बीच रेशनलिस्ट असोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य संजय पोननम ने घटना की सत्यता की जांच करने का निर्णय लिया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से स्थिति का विश्लेषण किया और पाया कि मूर्ति से बहने वाला पानी किसी चमत्कार का परिणाम नहीं था। असल में मूर्ति के पास स्थित एक बंद शौचालय पाइप से पानी का रिसाव हो रहा था, जो धीरे-धीरे दीवारों से होता हुआ मूर्ति के पैरों तक पहुंच रहा था।
खुलासे ने लोगों को चौंका दिया
इस खुलासे ने कई लोगों को चौंका दिया और यह घटना समाज में अंधविश्वास और तथाकथित चमत्कारों के प्रति सजग दृष्टिकोण अपनाने का संदेश बन गई। संजय पोननम ने इस घटना के बाद बताया कि अंधविश्वास से ऊपर उठकर तर्कसंगत सोच अपनाने की आवश्यकता है और किसी भी घटना की वास्तविकता की परख किए बिना उसे चमत्कार मान लेना खतरनाक हो सकता है।
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