
नई दिल्ली। सरकार ने आज लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पेश करने की तैयारी कर ली है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू इसे दोपहर 12 बजे सदन में चर्चा के लिए प्रस्तुत करेंगे। इस विधेयक पर चर्चा के लिए सरकार ने आठ घंटे का समय निर्धारित किया है, जिसमें से चार घंटे 40 मिनट समय राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को मिलेगा, जबकि बाकी समय विपक्ष को दिया जाएगा। विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है।
संसद में हंगामे के आसार
विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर गहरी आपत्ति जताई और उन्होंने चर्चा का समय बढ़ाकर 12 घंटे करने की मांग की। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है, ताकि प्रत्येक पार्टी अपना रुख स्पष्ट कर सके। विपक्ष का आरोप है कि यह विधेयक असंवैधानिक है और इसे राज्य के अधिकारों का उल्लंघन करार दिया गया है।
इन पार्टी ने किया विधेयक का समर्थन
वक्फ संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए सरकार का रुख दृढ़ है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अलावा, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के अन्य चार प्रमुख घटक दल – तेलुगुदेशम पार्टी (TDP), जनता दल यूनाइटेड (JDU), शिवसेना, और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने इस विधेयक का समर्थन किया है और अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है। हालांकि, कुछ बीजेपी सहयोगी दलों ने विधेयक में और संशोधन की मांग की है, और पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने आशा जताई कि बीजेपी उनकी चिंताओं को ध्यान में रखेगी।
विधेयक के विपक्ष में हैं ये पाटियां
वक्फ बिल को लेकर विपक्षी पार्टियां लगातार अपना विरोध दर्ज कराती रही हैं। इनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों के नाम शामिल हैं। समाजवादी पार्टी ने बिल को लेकर व्हिप जारी किया है। इसमें सभी सांसदों को मौजूद रहने के लिए कहा गया है। इस बिल को लेकर अपनी रणनीति बनाने के लिए मंगलवार शाम को विपक्ष ने बैठक की, जिसमें इंडिया गठबंधन के सभी घटक शामिल हुए।
विधेयक में तीन प्रमुख संशोधन
इस विधेयक में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। सरकार ने JDU और TDP के सुझावों को मानते हुए विधेयक में तीन प्रमुख संशोधन किए हैं:
- यह कानून पिछली तारीख से लागू नहीं होगा।
- पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और अन्य मुस्लिम धार्मिक स्थलों के साथ छेड़छाड़ नहीं की जाएगी।
- भूमि से संबंधित मामलों में राज्य सरकारों की स्पष्ट राय ली जाएगी।
विपक्षी दलों ने इस विधेयक पर गहरी आपत्ति जताई है और इसे संविधान के खिलाफ मानते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की चेतावनी दी है। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस विधेयक पर आपत्ति जताई है और इसे खारिज किया, वहीं DMK सांसद ए राजा ने कहा कि रिपोर्ट पहले से ही तैयार थी और यह समिति की कार्यवाही में पक्षपाती थी।
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