
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को अपनी मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी (MPC Meeting) के फैसलों का ऐलान कर दिया है। आरबीआई ने रेपो रेट में 0.50 फीसदी का इजाफा कर दिया है। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति के फैसलों का एलान करते हुए कहा कि रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की जा रही है। अब आरबीआई की रेपो रेट 5.4% से बढ़कर 5.9% हो गई है।
RBI के गवर्नर ने क्या कहा ?
आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने चुनौतियां हैं और जियो-पॉलिटिकल परिस्थियों में बदलाव का असर भी देखा जा रहा है। पिछले 2.5 सालों में दुनिया ने दो बड़े ग्लोबल बदलाव देखे हैं और ये थे कोविड का संकटकाल और रूस-यूक्रेन युद्ध। लगातार चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने इसका उचित तरीके से सामना किया है।
देश में ग्रामीण डिमांड में तेजी देखने को मिली है और निवेश की स्थितियों में भी सुधार देखने को मिला है। हालांकि, अब महंगाई दर के काबू में आने की उम्मीदें हैं। वित्त वर्ष 2023 के लिए महंगाई दर का अनुमान 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
शक्तिकांत दास ने कहा कि महंगाई की दरें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं और देश को आयातित प्रोडक्ट्स की ऊंची दरों का सामना करना पड़ रहा है। इसके पीछे करेंसी की बढ़ती कीमतें भी कारण हैं। भारत में महंगाई दर के आगे भी बढ़ने की आशंका है पर भारत की स्थिति कई इमर्जिंग इकोनॉमी के मुकाबले काफी बेहतर है।
शक्तिकांत दास ने कहा है कि आरबीआई का अकोमोडेटिव विड्ररॉल रुख बरकरार है और इसके पीछे इंफ्लेशन रेट का लगातार बढ़ना एक बड़ा कारण है।
महंगी होगी EMI!
आरबीआई के इस फैसले के बाद होम लोन से लेकर कार लोन और एजुकेशन लोन का महंगा होना तय है। वहीं, जिन लोगों ने पहले से होम लोन लिया हुआ है उनकी ईएमआई और महंगी हो जाएगी। आरबीआई गर्वनर ने रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की तीन दिनों की बैठक के बाद लिया है।
चौथी बार कर्ज हुआ महंगा
- वित्त वर्ष 2022-23 में आरबीआई महंगाई बढ़ने के बाद लगातार चौथी बार रेपो रेट में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
- इससे पहले 4 मई को रेपो रेट में 40 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर40 फीसदी किया गया।
- इसके बाद 8 जून को 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई।
- इसके बाद अगस्त में फिर से 50 बेसिस प्वाइंट रेपो रेट बढ़ा दिया गया।
- 30 सितंबर 2022 को फिर से रेपो रेट में 50 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी कर दी गई।
आरबीआई के इस फैसले के बाद रेपो रेट में 1.90 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। आरबीआई के लेटेस्ट फैसले के बाद निजी से लेकर सरकारी बैंक कर्ज महंगा कर सकते हैं।
क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट ?
जानकारी के मुताबिक, रेपो रेट वे दर है जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। बता दें कि रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट इसके उलट होता है। रिवर्स रेपो रेट वे दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा पर RBI से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजार में लिक्विडिटी कंट्रोल किया जाता है।
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— Peoples Samachar (@psamachar1) September 30, 2022
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