
भारतीय मूल के अरबपति और ओसवाल ग्रुप के मालिक पंकज ओसवाल की बेटी वसुंधरा ओसवाल ने हाल ही के इंटरव्यू में हिरासत में होने का अनुभव शेयर किया है। उन्होंने अब युगांडा पुलिस पर मानवाधिकार उल्लंघन का आरोप लगाया है। साथ ही हिरासत में रहने के दौरान के डरावने अनुभव को शेयर किया है। दरअसल, वसुंधरा पिछले साल युगांडा पुलिस की हिरासत में 3 हफ्ते तक रही। उन पर कंपनी के पूर्व कर्मचारी के अपहरण और हत्या का आरोप लगाया गया था। लेकिन बाद में पता चला कि वह कर्मचारी जिंदा था! इसके बावजूद वसुंधरा को 21 अक्टूबर तक हिरासत में रखा गया।
बिना वारंट जेल, टॉयलेट पर भी पाबंदी!
अपने एक इंटरव्यू में वसुंधरा ने बताया कि युगांडा पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया। 1 अक्टूबर 2024 को 20 हथियारबंद लोग बिना किसी वारंट या पहचान पत्र के उन्हें उनके प्लांट से उठाकर ले गए। इसके साथ वहां भोजन, पानी और टॉयलेट तक जाने पर रोक थी। इतनी दिक्कत आने पर उनके परिवार को रिश्वत देकर बुनियादी जरूरतें पहुंचानी पड़ीं। साथ ही जिस कर्मचारी के अपहरण और हत्या का आरोप था, वह 10 अक्टूबर को जिंदा पाया गया, फिर भी उन्हें 11 दिन और हिरासत में रखा गया।
कैसे हुई गिरफ्तारी? पिता को लड़नी पड़ी कानूनी लड़ाई
वसुंधरा की गिरफ्तारी के बाद उनके पिता पंकज ओसवाल ने यूनाइटेड नेशंस (UN) से अपील की और कहा कि उनकी बेटी को गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया है। ओसवाल परिवार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि वसुंधरा मानसिक तनाव से गुजर रही थी, लेकिन युगांडा पुलिस ने इस पर ध्यान नहीं दिया।
कौन हैं वसुंधरा ओसवाल?
26 साल की वसुंधरा ओसवाल का पालन-पोषण भारत, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड में हुआ। उन्होंने स्विट्जरलैंड की यूनिवर्सिटी से फाइनेंस की डिग्री ली। वे ओसवाल ग्रुप की अफ्रीकी कंपनी प्रो-इंडस्ट्रीज की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हैं। इसके साथ साल 2023 में उन्हें ‘ग्लोबल यूथ आइकॉन अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था।
वसुंधरा ने युगांडा पुलिस के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की बात कही है। उनकी गिरफ्तारी के तरीके और मानवाधिकार हनन को लेकर इंटरनेशनल लेवल पर सवाल उठ रहे हैं। ओसवाल ग्रुप इस मामले को कानूनी तरीके से लड़ने की तैयारी कर रहा है।