
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले स्थित गंगोत्री मंदिर के कपाट शनिवार (2 नवंबर) दोपहर 12 बजकर 14 मिनट पर अन्नकूट के पावन अवसर पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ मां गंगा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा (मुखीमठ) के लिए रवाना हुई। कपाट बंद होने के दौरान गंगोत्री धाम में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। हर-हर गंगे जय मां गंगा के जयकारों से गंगोत्री धाम गूंज उठा। सेना के बैंड और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ मां गंगा की डोली अपने शीतकालीन प्रवास मुखबा (मुखीमठ) के लिए रवाना हुई। मंदिर समिति के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
गढ़वाल हिमालय में स्थित चार धाम (केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री) के कपाट शीतकाल में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। गंगोत्री मंदिर समित के सचिव सुरेश सेमवाल ने बताया कि समुद्र तल से करीब 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित गंगोत्री मंदिर के कपाट अन्नकूट के शुभ अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों के बीच दोपहर 12.14 बजे बंद कर दिए गए। सेमवाल ने बताया कि देवी गंगा की प्रतिमा एक पालकी में रखकर मुखबा के लिए रवाना की गई, जहां पूरे शीतकाल के दौरान उनकी पूजा की जाएगी।
इस साल 8 लाख श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
चार धाम में गंगोत्री मंदिर के कपाट सबसे पहले बंद किए गए। इस बार आठ लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने इस मंदिर में दर्शन किए। यमुनोत्री और केदारनाथ मंदिर के कपाट रविवार को, जबकि बदरीनाथ मंदिर के कपाट 17 नवंबर को बंद किए जाएंगे। इन चारों मंदिरों के कपाट हर साल अप्रैल-मई में गर्मियों की शुरुआत के बाद खोले जाते हैं।
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