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अमेरिका के जवाबी टैरिफ का भारतीय बाजार पर असर, जानें किन क्षेत्रों पर पड़ेगा गहरा प्रभाव? 

अमेरिका द्वारा भारत पर संभावित जवाबी टैरिफ लगाने की अटकलों के बीच भारतीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। अगर यह टैरिफ लागू होते हैं, तो भारत के प्रमुख एक्सपोर्ट क्षेत्रों को झटका लग सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे देश के कृषि, इलेक्ट्रॉनिक्स, रत्न और आभूषण, फार्मा, ऑटोमोबाइल और कपड़ा उद्योग पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है। इससे अरबों डॉलर के व्यापार को नुकसान हो सकता है और भारतीय कंपनियों को चुनौतियों का भी सामना करना पड़ेगा।

किन छह क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?

  1. कृषि क्षेत्र 

अमेरिकी टैरिफ का सबसे ज्यादा प्रभाव भारतीय कृषि उत्पादों पर पड़ सकता है। भारत हर साल अमेरिका को बड़ी मात्रा में मछली, मांस और सीफूड एक्सपोर्ट करता है। 2024 में इनका कुल एक्सपोर्ट 2.58 अरब डॉलर था। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र पर 27% से अधिक टैरिफ बढ़ने की आशंका है, जिससे समुद्री खाद्य उद्योग को तगड़ा झटका लग सकता है। भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले झींगे का 40% हिस्सा आता है, जो टैरिफ के कारण कंपटीशन में पिछड़ सकता है।

इसके अलावा, भारत से अमेरिका को एक्सपोर्ट होने वाले खाद्य तेल, डेयरी उत्पाद, अनाज, फल, मसाले, शराब और पशु उत्पादों पर भी टैरिफ बढ़ सकता है, जिससे इनकी अमेरिकी बाजार में मांग घट सकती है।

  1. इलेक्ट्रॉनिक्स 

भारत ने वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को 11.1 अरब डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों का एक्सपोर्ट किया, जो कुल इलेक्ट्रॉनिक एक्सपोर्ट का 32% हिस्सा था। अमेरिका के संभावित जवाबी टैरिफ से असेंबल किए गए मोबाइल फोन, खासकर आईफोन के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों की रणनीति प्रभावित होगी और अमेरिका में कंपटीशन बढ़ सकती है।

  1. रत्न और आभूषण 

भारत हर साल करीब 33 अरब डॉलर के रत्न और आभूषण का एक्सपोर्ट करता है, जिसमें अमेरिका की हिस्सेदारी 30% (9.9 अरब डॉलर) है। अगर अमेरिका इस सेक्टर पर टैरिफ बढ़ाता है, तो कटे और पॉलिश किए गए हीरे, सोने के आभूषण और लैब में बनाए गए हीरे महंगे हो सकते हैं, जिससे भारतीय आभूषण अमेरिकी बाजार में कंपटीशन खो सकते हैं।

  1. फार्मा उद्योग/ जेनेरिक दवा  

भारत, अमेरिका को जेनेरिक दवाओं का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है और यहां के कुल जेनेरिक दवा आयात का 47% हिस्सा भारत से आता है। भारतीय दवाएं सस्ती होती हैं, इसलिए विशेषज्ञों को उम्मीद है कि इस क्षेत्र पर टैरिफ लगाने की संभावना कम है। हालांकि, अगर टैरिफ 10% से ज्यादा बढ़ता है, तो फार्मा कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

  1. ऑटोमोबाइल सेक्टर 

अमेरिका, भारत के वाहन एक्सपोर्ट का बड़ा डेस्टिनेशन नहीं है। इसलिए इस सेक्टर पर प्रभाव सीमित रह सकता है। हालांकि, ऑटो कंपोनेंट्स के एक्सपोर्ट पर असर हो सकता है। वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को कुल ऑटो कंपोनेंट एक्सपोर्ट का 27% हिस्सा था। टैरिफ बढ़ने से इंजन, ट्रांसमिशन और पावरट्रेन उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारतीय ऑटो कंपनियों को नुकसान हो सकता है।

  1. कपड़ा और परिधान 

भारत ने वित्त वर्ष 2024 में अमेरिका को 9.6 अरब डॉलर के कपड़ों और वस्त्रों का एक्सपोर्ट किया, जो कुल एक्सपोर्ट का 28% था। अगर अमेरिका इस पर टैरिफ बढ़ाता है, तो भारतीय उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं और अमेरिकी खरीदार वियतनाम और बांग्लादेश जैसे सस्ते विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे भारतीय कपड़ा उद्योग को नुकसान हो सकता है।

बाजार को ट्रंप के फैसले का इंतजार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर भारतीय बाजार की निगाहें टिकी हुई हैं। विदेशी निवेशक भी इस पर नजर बनाए हुए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत से समाधान निकल सकता है, जिससे इन टैरिफ के प्रभाव को कम किया जा सकता है। अब देखना होगा कि ट्रंप प्रशासन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाता है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है।

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